भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – ३१ चतुर्थी – कल्प में शिवा, शान्ता तथा सुखा – तीन प्रकार की चतुर्थी का फल और उनका व्रत-विधान सुमन्तु मुनिने कहा – राजन् ! चतुर्थी तिथि तीन प्रकार की होती है – शिवा, शान्ता… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २९ से ३० विनायक – पूजा का माहात्म्य शतानीक ने कहा – मुने ! अब आप मुझे भगवान् गणेश की आराधना के विषय में बतलाये । सुमन्तु मुनि बोले – राजन् ! भगवान् गणेश की आराधना में किसी तिथि, नक्षत्र या उपवासादि… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २८ स्त्रियों के शुभाशुभ- लक्षण ब्रह्माजी बोले – कार्तिकेय ! स्त्रियों के जो लक्षण मैंने पहले नारदजी को बतलाये थे, उन्हीं शुभाशुभ-लक्षणों को बताता हूँ । आप सावधान होकर सुनें – शुभ मुहूर्त में कन्या के हाथ, पैर, अँगुली, नख, हाथ की… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम: श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय- २७ राजपुरुषों के लक्षण कार्तिकेयजी ने कहा – ब्रह्मन् ! आप राजाओं के शरीर के अङ्गों के लक्षणों को बताने की कृपा करें । ब्रह्माजी बोले – मैं मनुष्यों में राजाओं के अङ्गों के लक्षणों को संक्षेप में बताता हूँ । यदि ये… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय- २४ से २६ पुरुषों के शुभाशुभ लक्षण राजा शतानीक ने पूछा – विप्रेन्द ! स्त्री और पुरुष के जो लक्षण कार्तिकेय ने बनाये थे और जिस ग्रन्थ को क्रोध में आकर भगवान शिव ने समुद्र में फेंक दिया था, वह कार्तिकेय को… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण ( ब्राह्मपर्व ) अध्याय – २३ चतुर्थी-कल्प-वर्णन में गणेशजी का विघ्न-अधिकार तथा उनकी पूजा-विधि राजा शतानीक ने सुमन्तु मुनि से पूछा – विप्रवर ! गणेशजी को गणों का राजा किसने बनाया और बड़े भाई कार्तिकेय के रहते हुए ये कैसे विघ्नों के अधिकारी हो गये… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २२ चतुर्थी-व्रत एवं गणेशजी की कथा तथा सामुद्रिक शास्त्र का परिचय सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन् ! तृतीया-कल्प का वर्णन करने के अनन्तर अब मैं चतुर्थी-कल्प का वर्णन करता हूँ । चतुर्थी-तिथि में सदा निराहार रहकर व्रत करना चाहिये । ब्राह्मण… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २१ तृतीया-कल्प का आरम्भ. गौरी-तृतीया-व्रत-विधान और उसका फल सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन ! जो स्त्री सब प्रकार का सुख चाहती है, उसे तृतीया का व्रत करना चाहिये । उस दिन नमक नहीं खाना चाहिये । इस विधि से उपवास-पूर्वक जीवन-पर्यन्त… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २० फल-द्वितीया (अशून्यशयन-व्रत) का व्रत-विधान और द्वितीया-कल्प की समाप्ति राजा शतानीक ने कहा – मुने ! कृपाकर आप फल-द्वितीया का विधान कहें, जिसके करने से स्त्री विधवा नहीं होती और पति-पत्नी का परस्पर वियोग भी नहीं होता । सुमन्तु मुनि ने कहा… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय १९ द्वितीया – कल्प मे महर्षि च्यवन की कथा एवं पुष्पद्वितीया – व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले — द्वितीया तिथि को च्यवन ऋषि ने इन्द्र के सम्मुख यज्ञ में अश्विनी-कुमारों को सोमपान कराया था। राजा ने पूछा – महाराज ! इन्द्र के… Read More