श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-35 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चत्रिंशोऽध्यायः पैंतीसवाँ अध्याय विभिन्न पापकर्मों से प्राप्त होने वाली विभिन्न योनियों का वर्णन नानाकर्मविपाकफलकथनम् धर्मराज बोले — हे साध्वि ! देवताओं की उपासना के बिना कर्म-बन्धन से मुक्ति नहीं होती । शुद्ध कर्म का बीज शुद्ध होता है और कुकर्म… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-34 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुस्त्रिंशोऽध्यायः चौंतीसवाँ अध्याय विभिन्न पापकर्म तथा उनके कारण प्राप्त होने वाले नरकों का वर्णन नानाकर्मविपाकफलवर्णनम् यमराज बोले — [ हे सावित्रि!] भारतवर्ष में जो कोई निर्दयी तथा क्रूर व्यक्ति खड्ग से किसी जीव को काटता है या कोई नरघाती धन… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-33 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः तैंतीसवाँ अध्याय विभिन्न नरककुण्डों में जाने वाले पापियों तथा उनके पापों का वर्णन नानाकर्मविपाकफलकथनम् धर्मराज बोले — हे साध्वि ! भगवान् श्रीहरि की सेवामें संलग्न रहने वाला, विशुद्धात्मा, योगसिद्ध, व्रती, तपस्वी तथा ब्रह्मचारी पुरुष निश्चित ही नरक में नहीं… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-32 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्वात्रिंशोऽध्यायः बतीसवाँ अध्याय धर्मराज का सावित्री को अशुभ कर्मों के फल बताना सावित्र्युपाख्याने कुण्डसंख्यानिरूपणम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] सूर्यपुत्र यमराज सावित्री को विधिपूर्वक भगवती के महामन्त्र मायाबीज की दीक्षा प्रदानकर उसे प्राणियों के अशुभ कर्म का फल बताने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय सावित्री का यमाष्टक द्वारा धर्मराज का स्तवन यमाष्टकवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] यम के मुख से भगवती के नामकीर्तन की महिमा सुनकर सावित्री के नेत्रों में अश्रु भर आये और उसका शरीर पुलकित हो गया।… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय दिव्य लोकों की प्राप्ति कराने वाले पुण्यकर्मों का वर्णन यमेन कर्मविपाककथनम् सावित्री बोली — हे यम ! जिस कर्म के प्रभाव से पुण्यवान् मनुष्य स्वर्ग आदि अन्य लोकों में जाते हैं, उसे मुझे बताने की कृपा कीजिये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उन्नतीसवाँ अध्याय सावित्री-धर्मराज के प्रश्नोत्तर और धर्मराज द्वारा सावित्री को वरदान सावित्र्युपाख्याने कर्मविपाकवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] सावित्री की बात सुनकर यमराज आश्चर्य में पड़ गये और हँसकर उन्होंने प्राणियों के कर्मफल के विषय में बताना आरम्भ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अठ्ठाईसवाँ अध्याय सावित्री – यमराज – संवाद सावित्र्युपाख्याने यमसावित्रीसंवादवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे मुने!] यमराज की बात सुनकर पतिव्रता तथा दृढ़ निश्चय वाली सावित्री ने परम भक्ति के साथ उनकी स्तुति की और वह उनसे कहने लगी ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय भगवती सावित्री की उपासना से राजा अश्वपति को सावित्री नामक कन्या की प्राप्ति, सत्यवान्‌ के साथ सावित्री का विवाह, सत्यवान् की मृत्यु, सावित्री और यमराज का संवाद सावित्र्युपाख्याने यमसावित्रीसंवादवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! राजा अश्वपति ने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षड्‌विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय सावित्रीदेवी की पूजा-स्तुति का विधान सावित्रीपूजाविधिकथनम् नारदजी बोले — तुलसी की यह अमृततुल्य कथा तो मैंने सुन ली, अब आप सावित्री की कथा कहने की कृपा कीजिये। ऐसा सुना गया है कि वे सावित्री वेदों की जननी… Read More