श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-15 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-15 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चदशोऽध्यायः पन्द्रहवाँ अध्याय तुलसी के कथा-प्रसंग में राजा वृषध्वज का चरित्र-वर्णन नारायणनारदसंवादे शक्तिप्रादुर्भावः नारदजी बोले — परम साध्वी तुलसी भगवान् श्रीहरि की प्रिय भार्या कैसे बनीं, वे कहाँ उत्पन्न हुई थीं, पूर्वजन्म में कौन थीं, किसके कुल में उत्पन्न हुई… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-14 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय गंगा के विष्णु पत्नी होने का प्रसंग गङ्गायाः कृष्णपत्नीत्ववर्णनम् नारदजी बोले — [ हे प्रभो ! ] यह तो मैंने आपसे सुन लिया कि लक्ष्मी, सरस्वती, गंगा और विश्वपावनी तुलसी — ये चारों ही भगवान् नारायण की… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-13 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय श्रीराधाजी के रोष से भयभीत गंगा का श्रीकृष्ण के चरणकमलों की शरण लेना, श्रीकृष्ण के प्रति राधा का उपालम्भ, ब्रह्माजी की स्तुति से राधा का प्रसन्न होना तथा गंगा का प्रकट होना गङ्गोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-12 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय गंगा के ध्यान एवं स्तवन का वर्णन, गोलोक में श्रीराधा-कृष्ण के अंश से गंगा के प्रादुर्भाव की कथा गङ्गोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] कण्वशाखा में कहा गया यह देवी-ध्यान सभी पापों का नाश करने वाला… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-11 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय गंगा की उत्पत्ति एवं उनका माहात्म्य गङ्गोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! पृथ्वी का यह परम मनोहर उपाख्यान मैं सुन चुका; अब आप गंगा का उपाख्यान कहिये । सुरेश्वरी, विष्णुस्वरूपा और स्वयं विष्णुपदी —… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-10 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय पृथ्वी के प्रति शास्त्र-विपरीत व्यवहार करने पर नरकों की प्राप्ति का वर्णन पृथिव्युपाख्याने नरकफलप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — भूमि का दान करने से होने वाले पुण्य तथा उसका हरण करने से होने वाले पाप, दूसरे की भूमि छीनने… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-09 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय पृथ्वी की उत्पत्ति का प्रसंग, ध्यान और पूजन का प्रकार तथा उनकी स्तुति नारायणनारदसंवादे कलिमाहात्म्यवर्णनम् नारदजी बोले — [ हे भगवन्!] आपने बतलाया कि देवी के निमेषमात्र व्यतीत होने पर ब्रह्मा का अन्त हो जाता है और… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-08 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय कलियुग का वर्णन, परब्रह्म परमात्मा एवं शक्तिस्वरूपा मूलप्रकृति की कृपा से त्रिदेवों तथा देवियों के प्रभाव का वर्णन और गोलोक में राधा-कृष्ण का दर्शन नारायणनारदसंवादे कलिमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] गंगा के शाप से सरस्वती… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-07 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय भगवान् नारायण का गंगा, लक्ष्मी और सरस्वती से उनके शाप की अवधि बताना तथा अपने भक्तों के महत्त्व का वर्णन करना गङ्गादीनां शापोद्धारवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! ऐसा कहकर जगत् के स्वामी भगवान् विष्णु चुप हो… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-06 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय लक्ष्मी, सरस्वती तथा गंगा का परस्पर शापवश भारतवर्ष में पधारना लक्ष्मीगङ्गासरस्वतीनां भूलोकेऽवतरणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुने! साक्षात् भगवान् विष्णु के पास वैकुण्ठ में रहने वाली सरस्वती कलह के कारण गंगाजी के द्वारा दिये गये शाप से… Read More