श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-05 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय याज्ञवल्क्य द्वारा भगवती सरस्वती की स्तुति याज्ञवल्क्यकृतं सरस्वतीस्तोत्रवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुने ! अब आप वाग्देवी सरस्वती का वह स्तोत्र सुनिये, जो सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाला है और जिसके द्वारा महामुनि याज्ञवल्क्य ने प्राचीन… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-04 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय सरस्वती की पूजा का विधान तथा कवच सरस्वतीस्तोत्रपूजाकवचादिवर्णनम् नारदजी बोले — हे भगवन्! मैंने आपकी कृपा से यह अमृततुल्य सारी कथा तो सुन ली, अब आप प्रकृतिदेवियों के पूजन का विस्तृत वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ किसने… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-03 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी राधा से प्रकट विराट्रूप बालक का वर्णन ब्रह्मविष्णुमहेश्वरादिदेवतोत्पत्तिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — वह बालक जो पहले जल में छोड़ दिया गया था, ब्रह्माजी की आयुपर्यन्त जल में ही पड़ा रहा। उसके बाद वह समय… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-02 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दुसरा अध्याय परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधा से प्रकट चिन्मय देवताओं एवं देवियों का वर्णन पञ्चप्रकृतितद्भर्तृगणोत्पत्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे प्रभो ! देवियों का सम्पूर्ण चरित्र मैंने संक्षेप में सुन लिया, अब सम्यक् प्रकार से बोध प्राप्त करने के लिये… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-01 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय प्रकृतितत्त्वविमर्श: प्रकृति के अंश, कला एवं कलांश से उत्पन्न देवियों का वर्णन प्रकृतिचरित्रवर्णनम् श्रीनारायण बोले — सृष्टिविधान में मूलप्रकृति पाँच प्रकार की कही गयी है — गणेशजननी दुर्गा, राधा, लक्ष्मी, सरस्वती और सावित्री ॥ १ ॥ नारदजी… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-24 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय देवी की उपासना के विविध प्रसंगों का वर्णन देवीपूजनविधिनिरूपणम् नारदजी बोले — हे तात! देवी के आराधनरूपी धर्म का स्वरूप क्या है ? किस प्रकार से उपासना करने पर वे देवी परम पद प्रदान करती हैं ?… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-23 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय नरक प्रदान करने वाले विभिन्न पापों का वर्णन अवशिष्टनरकवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे देवर्षे ! जो दान और धन के आदान-प्रदान में साक्षी बनकर सदा झूठ बोलते हैं, वे पापबुद्धि मनुष्य मरने पर सौ योजन ऊँचे पर्वत-शिखर… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-22 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय विभिन्न नरकों का वर्णन नरकप्रदपातकवर्णनम् नारदजी बोले — हे सनातन मुने! विविध प्रकार की यातनाओं की प्राप्ति कराने वाले कर्मों के भेद कितने प्रकार के होते हैं; मैं इनके विषय में भलीभाँति सुनना चाहता हूँ ॥ १… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-21 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय देवर्षि नारद द्वारा भगवान् अनन्त की महिमा का गान तथा नरकों की नामावली नरकस्वरूपवर्णनम् श्रीनारायण बोले — ब्रह्मा के पुत्र महाभाग नारद ब्रह्मदेव की सभा में उन भगवान् शेष की महिमा का गान करते हुए उनकी उपासना… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-20 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय तलातल, महातल, रसातल और पाताल तथा भगवान् अनन्त का वर्णन तलातलादिलोकवर्णनेऽनन्तवर्णनम् श्रीनारायण बोले — उस सुतल के नीचे के विवर को ‘तलातल’ कहा गया है । वहाँ त्रिपुराधिपति मय नामक महान् दानव रहता है ॥ १ ॥… Read More