श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-45 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः पैंतालीसवाँ अध्याय भगवती दक्षिणा का उपाख्यान दक्षिणोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] मैंने भगवती स्वाहा तथा स्वधा का अत्यन्त मधुर तथा कल्याणकारी उपाख्यान बता दिया। अब मैं भगवती दक्षिणा का आख्यान कह रहा हूँ, सावधान होकर सुनिये ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-44 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः चौवालीसवाँ अध्याय भगवती स्वधा का उपाख्यान स्वधोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! सुनिये, अब मैं स्वधा का उत्तम आख्यान कहूँगा, जो पितरों के लिये तृप्ति-कारक तथा श्राद्धान्न के फल की वृद्धि करने वाला है ॥ १ ॥ जगत् का… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-43 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः तैंतालीसवाँ अध्याय भगवती स्वाहा का उपाख्यान स्वाहोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे नारायण ! हे महाभाग ! हे महाप्रभो ! आप रूप, गुण, यश, तेज और कान्ति में साक्षात् नारायण ही हैं ॥ १ ॥ हे मुने! हे वेदवेत्ताओं में… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-42 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्विचत्वारिंशोऽध्यायः बयालीसवाँ अध्याय इन्द्र द्वारा भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन एवं स्तवन महालक्ष्म्याः ध्यानस्तोत्रवर्णनम् नारदजी बोले — हे प्रभो ! मैंने भगवान् श्रीहरि का कल्याणप्रद गुणानुवाद, उनका उत्तम ज्ञान तथा भगवती लक्ष्मी का अभीष्ट उपाख्यान सुना। अब उन देवी के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-41 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकचत्वारिंशोऽध्यायः इकतालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का इन्द्र तथा देवताओं को साथ लेकर श्रीहरि के पास जाना, श्रीहरि का उनसे लक्ष्मी के रुष्ट होने के कारणों को बताना, समुद्रमन्थन तथा उससे लक्ष्मीजी का प्रादुर्भाव श्रीलक्ष्म्युपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! भगवान्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-40 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चत्वारिंशोऽध्यायः चालीसवाँ अध्याय दुर्वासा के शाप से इन्द्र का श्रीहीन हो जाना लक्ष्म्युत्पत्तिवर्णनम् नारदजी बोले — [हे भगवन्!] वे श्रेष्ठ महालक्ष्मी भगवान् नारायण की प्रिया होकर वैकुण्ठ में निवास करती हैं। वे सनातनी भगवती वैकुण्ठ की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-39 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकोनचत्वारिंशोऽध्यायः उनतालीसवाँ अध्याय भगवती लक्ष्मी का प्राकट्य, समस्त देवताओं द्वारा उनका पूजन लक्ष्म्युपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — [ हे भगवन् ! ] मैं सावित्री तथा धर्मराज के संवाद में निराकार मूलप्रकृति भगवती गायत्री का निर्मल यश सुन चुका। उनके गुणों का… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-38 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टत्रिंशोऽध्यायः अड़तीसवाँ अध्याय धर्मराज का सावित्री से भगवती की महिमा का वर्णन करना और उसके पति को जीवनदान देना सावित्र्युपाख्यानवर्णनम् सावित्री बोली — [ हे प्रभो ! ] आप मुझे भगवती की भक्ति प्रदान कीजिये; वह देवीभक्ति समस्त तत्त्वों का… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-37 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तत्रिंशोऽध्यायः सैंतीसवाँ अध्याय विभिन्न नरककुण्ड तथा वहाँ दी जानेवाली यातना का वर्णन नानानरककुण्डवर्णनम् धर्मराज बोले — हे साध्वि ! वे सभी नरककुण्ड पूर्ण चन्द्रमा की भाँति गोलाकार तथा बहुत गहरे हैं। अनेक प्रकार के पत्थरों से बनाये गये हैं ।… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-36 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षट्‌त्रिंशोऽध्यायः छतीसवाँ अध्याय धर्मराज द्वारा सावित्री से देवोपासना से प्राप्त होने वाले पुण्यफलों को कहना देवपूजनात् सर्वारिष्टनिवृत्तिवर्णनम् सावित्री बोली — हे वेद-वेदांग में पारंगत महाभाग धर्मराज! नानाविध पुराणों तथा इतिहासों में जो सारस्वरूप है, उसे प्रदर्शित कीजिये। अब आप मुझसे… Read More