श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय शौचाचार का वर्णन शौचविधिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] छहों अंगों सहित अधीत किये गये वेद भी आचारविहीन व्यक्ति को पवित्र नहीं कर सकते। पढ़े गये छन्द (वेद) ऐसे आचारहीन प्राणी को उसी भाँति मृत्युकाल में… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय भगवान् नारायण का नारदजी से देवी को प्रसन्न करने वाले सदाचार का वर्णन मनुकृतं देवीस्तवनम् नारद बोले — हे भगवन्! हे भूतभव्येश ! हे नारायण ! हे सनातन ! आपने भगवती के परम विस्मयकारक एवं श्रेष्ठ चरित्र… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय मनुपुत्रों की तपस्या, भगवती का उन्हें मन्वन्तराधिपति होने का वरदान देना, दैत्यराज अरुण की तपस्या और ब्रह्माजी का वरदान, देवताओं द्वारा भगवती की स्तुति और भगवती का भ्रामरी के रूप में अवतार लेकर अरुण का वध करना… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय समस्त देवताओं के तेज से भगवती महिषमर्दिनी का प्राकट्य और उनके द्वारा महिषासुर का वध, शुम्भ-निशुम्भ का अत्याचार और देवी द्वारा चण्ड-मुण्डसहित शुम्भ निशुम्भ का वध देवीचरित्रसहितं सावर्णिमनुवृतान्तवर्णनम् मुनि बोले — [ एक बार ] महिषी के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय सावर्णि मनु के पूर्वजन्म की कथा के प्रसंग में मधु-कैटभ की उत्पत्ति और भगवान् विष्णु द्वारा उनके वध का वर्णन देवीमाहात्म्ये मधुकैटभवधवर्णनम् राजा बोले — कालज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ ! आपने जिन देवी का वर्णन किया… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय वैवस्वत मनु का भगवती की कृपा से मन्वन्तराधिप होना, सावर्णि मनु के पूर्वजन्म की कथा सुरथनृपतिवृमत्तवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] राजा वैवस्वत सातवें मनु कहे गये हैं । समस्त राजाओं में मान्य तथा दिव्य आनन्द… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय चाक्षुष मनु की कथा, उनके द्वारा देवी की आराधना का वर्णन चाक्षुषमनुवृत्तवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] अब आप जगदम्बा का अद्भुत तथा उत्तम माहात्म्य और अंग के पुत्र मनु ने जिस तरह से श्रेष्ठ राज्य… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय स्वारोचिष, उत्तम, तामस और रैवत नामक मनुओं का वर्णन मनूत्पत्तिवर्णनम् शौनकजी बोले — [ हे सूतजी ! ] यह तो आपने आदिमन्वन्तर का उत्तम उपाख्यान कहा, अब दिव्य तेज वाले अन्य मनुओं की उत्पत्ति का वर्णन कीजिये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय अगस्त्यजी की कृपा से सूर्य का मार्ग खुलना विन्ध्यवृद्ध्यवरोधवर्णनम् सूतजी बोले — [ हे मुनियो !] देवताओं का यह वचन सुनकर द्विजश्रेष्ठ अगस्त्यमुनि ने उनसे कहा — मैं आप लोगों का यह कार्य करूँगा ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय भगवान् विष्णु का देवताओं को काशी में अगस्त्यजी के पास भेजना, देवताओं की अगस्त्यजी से प्रार्थना श्रीविष्णुना देवेभ्यो वरप्रदानम् सूतजी बोले — [ हे ऋषियो !] लक्ष्मीकान्त श्रीविष्णु के वचन से सभी देवता सन्तुष्ट हो गये ।… Read More