श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय भस्म न धारण करने पर दोष भस्मधारणमाहाम्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे देवर्षे ! अब रहस्य तथा विधान के साथ भस्म लगाने से प्राप्त होने वाले समस्त फल के विषय में सुनिये। यह भस्मोद्धूलन सभी कामनाओं को सफल… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय भस्म के प्रकार त्रिविधभस्ममाहात्म्यवर्णनम् नारदजी बोले — हे देव ! यह भस्म तीन प्रकार का कैसे कहा गया है ? यह मुझे आप बताइये, क्योंकि इस विषय में मुझे बहुत कौतूहल हो रहा है ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय भस्म-धारण की विधि भस्ममाहात्म्ये पाशुपतव्रतवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! अग्नि से तैयार किया गया ‘गौण’ भस्म भी अज्ञान का नाश करने वाला तथा ज्ञान का साधन है । इस गौण… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय भस्म-धारण ( शिरोव्रत ) सशिरोव्रतं त्रिपुण्डधारणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — जो द्विजातिगण शिरोव्रत (मस्तक पर भस्म धारण करने के नियम ) — का पालन करते हैं, उन्हीं को अज्ञान को नष्ट करने वाली पराविद्या के विषय में बताना… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय भूतशुद्धि भूतशुद्धिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे महामुने ! अब भूत-शुद्धि का प्रकार बता रहा हूँ। सर्वप्रथम मूलाधार से उठकर सुषुम्ना मार्ग पर होती हुई ब्रह्मरन्ध्र तक देवी परदेवता कुण्डलिनी के पहुँचने की भावना करे । तत्पश्चात् साधक… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय विभिन्न प्रकार के रुद्राक्ष और उनके अधिदेवता रुद्राक्षमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! इस प्रकार गिरिशायी भगवान् शिव ने षडानन को रुद्राक्ष के विषय में बताया और इस रुद्राक्षमहिमा को जानकर वे भी कृतार्थ हो गये। इस… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय रुद्राक्षधारण की महिमा के सन्दर्भ में गुणनिधि का उपाख्यान रुद्राक्षमाहात्म्ये गुणनिधिमोक्षवर्णनम् ईश्वर बोले — हे महासेन ! कुश-ग्रन्थि, पुत्रजीव (जियापोती) आदि से निर्मित तथा अन्य वस्तु से बनी हुई मालाओं में से कोई एक भी रुद्राक्ष-माला की… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय जपमाला का स्वरूप तथा रुद्राक्ष धारण का विधान रुद्राक्षजपमालाविधानवर्णनम् ईश्वर बोले — हे षडानन ! अब मैं जपमाला का लक्षण बताऊँगा, उसे सुनो। रुद्राक्ष के मुख को ब्रह्मा तथा बिन्दु (ऊपरी भाग ) – को रुद्र कहा… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय रुद्राक्ष की उत्पत्ति तथा उसके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन रुद्राक्षमाहात्म्यवर्णनम् नारदजी बोले — हे अनघ ! इस प्रकार का यह आपका महान् अनुग्रह है जो आपने रुद्राक्ष के विषय में बताया; यह महान् लोगों के लिये पूज्य… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय सदाचार-वर्णन और रुद्राक्ष धारण का माहात्म्य रुद्राक्षमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — (शुद्ध, स्मार्त, पौराणिक, वैदिक, तान्त्रिक तथा श्रौत — यह छः प्रकार का श्रुति- प्रतिपादित आचमन कहा गया है । मल-मूत्रादि के विसर्जन के पश्चात् शुद्धि के लिये… Read More