श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय देवताओं का विजयगर्व तथा भगवती उमा द्वारा उसका भंजन, भगवती उमा का इन्द्र को दर्शन देकर ज्ञानोपदेश देना पराशक्तेराविर्भाववर्णनम् जनमेजय बोले — सम्पूर्ण शास्त्रवेत्ताओं में श्रेष्ठ तथा समस्त धर्मों को जानने वाले हे भगवन् ! सभी द्विजातियों… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय दीक्षाविधि मन्त्रदीक्षाविधिवर्णनम् नारदजी बोले — [हे भगवन् ! ] मैंने यह श्रीगायत्रीदेवी का सहस्रनाम संज्ञक श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाला, महान् उन्नति की प्राप्ति कराने वाला तथा महान् भाग्योदय करने वाला स्तोत्र सुन लिया। अब मैं दीक्षा… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय गायत्रीसहस्त्रनाम स्तोत्र तथा उसके पाठ का फल गायत्रीसहस्रनामस्तोत्रवर्णनम् नारदजी बोले — सभी धर्मों को जानने वाले तथा सभी शास्त्रों में निष्णात हे भगवन्! मैंने आपके मुख से श्रुतियों, स्मृतियों तथा पुराणों से सम्बद्ध सभी प्रकार के पापों… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय गायत्री स्तोत्र तथा उसके पाठ का फल श्रीगायत्रीस्तोत्रवर्णनम् नारदजी बोले — हे भक्तों पर अनुकम्पा करने वाले ! हे सर्वज्ञ ! आपने पापों का नाश करने वाले गायत्रीहृदय का तो वर्णन कर दिया; अब गायत्री-स्तोत्र का कथन… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय गायत्री-हृदय तथा उसका अंगन्यास गायत्रीहृदयम् नारदजी बोले — हे भगवन्! हे देवदेवेश ! हे भूतभव्यजगत्प्रभो ! मैंने गायत्रीमन्त्रविग्रह तथा दिव्य गायत्रीकवच के विषय में सुन लिया। अब मैं श्रेष्ठ ‘गायत्रीहृदय’ सुनना चाहता हूँ, जिसके धारण करने से… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय श्रीगायत्री का ध्यान और गायत्री कवच का वर्णन गायत्रीमन्त्रकवचवर्णनम् नारदजी बोले — हे स्वामिन्! हे सम्पूर्ण जगत् के नाथ! हे प्रभो ! हे चौंसठ कलाओं के ज्ञाता! हे योगवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! मनुष्य किस पुण्यकर्म से पापमुक्त… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय गायत्री के चौबीस वर्णों की शक्तियों, रंगों एवं मुद्राओं का वर्णन गायत्रिशक्त्यादिप्रतिपादनम् श्रीनारायण बोले — हे महामुने ! उन वर्णों की कौन-कौन-सी शक्तियाँ हैं, अब आप उन्हें सुनिये। वामदेवी, प्रिया, सत्या, विश्वा, भद्रविलासिनी, प्रभावती, जया, शान्ता, कान्ता,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वादशः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-द्वादशः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय गायत्री जप का माहात्म्य तथा गायत्री के चौबीस वर्णों के ऋषि, छन्द आदि का वर्णन गायत्रीविचारः नारदजी बोले — हे देव ! हे प्रभो ! आपने सदाचार- विधि का वर्णन कर दिया; उस विधि का माहात्म्य अत्यन्त… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय कामना-सिद्धि और उपद्रव-शान्ति के लिये गायत्री के विविध प्रयोग प्रातश्चिन्तनम् नारदजी बोले — हे महाभाग ! हे नारायण ! हे करुणा-निधान ! अब आप गायत्री के शान्ति आदि से सम्बद्ध प्रयोगों का संक्षेप में वर्णन कीजिये ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-एकादशः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-एकादशः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय कृच्छ्रचान्द्रायण, प्राजापत्य आदि व्रतोंका वर्णन तप्तकृच्छ्रादिलक्षणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] साधकों में उत्तम विद्वान् पुरुष को भोजन के पश्चात् ‘ॐ अमृतापिधानमसि’ – इस मन्त्र का उच्चारण करके आचमन करना चाहिये और पात्र में अवशिष्ट अन्न… Read More