श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय आस्तीक मुनि के जन्म की कथा, कद्रू और विनता द्वारा सूर्य के घोड़े के रंग के विषय में शर्त लगाना और विनता को दासी भाव की प्राप्ति, कद्रू द्वारा अपने पुत्रों को शाप श्रोतृप्रवक्तृप्रसङ्गः सूतजी बोले —… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय जनमेजय का राजा बनना और उत्तंक की प्रेरणा से सर्प-सत्र करना, आस्तीक के कहने से राजा द्वारा सर्प-सत्र रोकना सर्पसत्रवर्णनम् सूतजी बोले — सभी मन्त्रियों ने राजा परीक्षित् को मृतक तथा उनके पुत्र जनमेजय को अबोध जानकर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय महाराज परीक्षित् को डँसने के लिये तक्षक का प्रस्थान, मार्ग में मन्त्रवेत्ता कश्यप से भेंट, तक्षक का एक वटवृक्ष को डँसकर भस्म कर देना और कश्यप का उसे पुनः हरा-भरा कर देना, तक्षक द्वारा धन देकर कश्यप… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय सर्प के काटने से प्रमद्वरा की मृत्यु, रुरु द्वारा अपनी आधी आयु देकर उसे जीवित कराना, मणि-मन्त्र-औषधि द्वारा सुरक्षित राजा परीक्षित् का सात तलवाले भवन में निवास करना परीक्षिद्‌राज्ञो गुप्तगृहे वासवर्णनम् परीक्षित्‌ बोले — [हे सचिववृन्द!] इस… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय धृतराष्ट्र आदि का दावाग्नि में जल जाना, प्रभासक्षेत्र में यादवों का परस्पर युद्ध और संहार, कृष्ण और बलराम का परमधामगमन, परीक्षित् को राजा बनाकर पाण्डवों का हिमालय- पर्वत पर जाना, परीक्षित् को शाप की प्राप्ति, प्रमद्वरा और… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय धृतराष्ट्र का युधिष्ठिर से दुर्योधन के पिण्डदान हेतु धन माँगना, भीमसेन का प्रतिरोध; धृतराष्ट्र, गान्धारी, कुन्ती, विदुर और संजय का वन के लिये प्रस्थान, वनवासी धृतराष्ट्र तथा माता कुन्ती से मिलने के लिये युधिष्ठिर का भाइयों के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठवाँ अध्याय दुर्वासा का कुन्ती को अमोघ कामद मन्त्र देना, मन्त्र के प्रभाव से कन्यावस्था में ही कर्ण का जन्म, कुन्ती का राजा पाण्डु से विवाह, शाप के कारण पाण्डु का सन्तानोत्पादन में असमर्थ होना, मन्त्र-प्रयोग से कुन्ती और… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-पँचमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय मत्स्यगन्धा ( सत्यवती )-को देखकर राजा शन्तनु का मोहित होना, भीष्म द्वारा आजीवन ब्रह्मचर्य-व्रत धारण करने की प्रतिज्ञा करना और शन्तनु का सत्यवती से विवाह देवव्रतप्रतिज्ञावर्णनम् ऋषिगण बोले — हे लोमहर्षणतनय सूतजी ! आपने शापवश अष्टवसुओं के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय गङ्गाजी द्वारा राजा शन्तनु का पति रुप में वरण, सात पुत्रों का जन्म तथा गङ्गा का उन्हे अपने जल में प्रवाहित करना, आठवें पुत्र के रुप में भीष्म का जन्म तथा उनकी शिक्षा-दीक्षा देवव्रतोत्पतिवर्णनम् सूतजी बोले —… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय राजा शन्तनु, गंगा और भीष्म के पूर्वजन्म की कथा प्रतीयसकाशाच्छन्तनुजन्मवर्णनम् ऋषिगण बोले — हे सूतजी! हे अनघ! यद्यपि आपने परम तेजस्वी व्यास तथा सत्यवती के जन्म की कथा विस्तारपूर्वक कही तथापि हम लोगों के चित्त में एक… Read More