श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय देवी के बीजमन्त्र की महिमा के प्रसंग में सत्यव्रत का आख्यान सत्यव्रताख्यानवर्णनम् जनमेजय बोले — वह द्विजश्रेष्ठ सत्यत्रत नामक ब्राह्मण कौन था, वह किस देश में पैदा हुआ था तथा कैसा था? यह मुझे बताइये ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय गुणों के परस्पर मिश्रीभाव का वर्णन, देवी के बीजमन्त्र की महिमा गुणानां गुणपरिज्ञानवर्णनम् नारदजी बोले — हे तात । आपने गुणों के लक्षणों का वर्णन किया, किंतु आपके मुख से निःसृत वाणीरूपी मधुर रस का पान करता… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण का वर्णन गुणानां रूपसंस्थानादिवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — हे तात! आपने जो मुझसे पूछा था, वह सृष्टि का वर्णन मैंने कर दिया। अब गुणों का स्वरूप कहता हूँ, उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय ब्रह्माजी के द्वारा परमात्मा के स्थूल और सूक्ष्म स्वरूप का वर्णन; सात्त्विक, राजस और तामस शक्ति का वर्णन; पंचतन्मात्राओं, ज्ञानेन्द्रियों, कर्मेन्द्रियों तथा पंचीकरण-क्रिया द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति का वर्णन तत्त्वनिरूपणवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — हे महाभाग! [नारद!] मैंने,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठवाँ अध्याय भगवती जगदम्बिका द्वारा अपने स्वरूप का वर्णन तथा ‘महासरस्वती’, ‘महालक्ष्मी’ और ‘महाकाली’ नामक अपनी शक्तियों को क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और शिव को प्रदान करना ब्रह्मणे श्रीदेव्या उपदेशवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — अत्यन्त नम्र भाव से मेरे पूछने पर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय ब्रह्मा और शिवजी का भगवती की स्तुति करना हरब्रह्मकृतस्तुतिवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — [ हे नारद!] इस प्रकार देवदेव जनार्दन भगवान् विष्णु के स्तुति कर लेने के उपरान्त भगवान् शिवशंकर विनीत भाव से देवीके सम्मुख स्थित होकर कहने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय भगवती के चरणनख में त्रिदेवों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का दर्शन होना, भगवान् विष्णु द्वारा देवी की स्तुति करना विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम् ब्रह्माजी बोले — हे नारद! ऐसा कहकर जनार्दन भगवान् विष्णु ने पुनः कहा — हम लोग… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और महेश का विभिन्न लोकों में जाना तथा अपने ही सदृश अन्य ब्रह्मा, विष्णु और महेश को देखकर आश्चर्यचकित होना, देवीलोक का दर्शन विमानस्थैर्हरादिभिर्देवीदर्शनम् ब्रह्माजी बोले — मन के समान वेग से उड़नेवाला वह विमान… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय भगवती आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन ब्रह्मादीनाङ्गतिवर्णनम् व्यासजी बोले — हे महाबाहो ! हे कुरुश्रेष्ठ ! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उन्हीं प्रश्नों को मेरे द्वारा मुनिराज नारदजी से पूछे जाने पर उन्होंने इस विषय में… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय राजा जनमेजय का ब्रह्माण्डोत्पत्ति विषयक प्रश्न तथा इसके उत्तर में व्यासजी का पूर्वकाल में नारदजी के साथ हुआ संवाद सुनाना भुवनेश्वरीवर्णनम् जनमेजय बोले — हे भगवन्! आपने महान् अम्बा-यज्ञ के विषय में कहा है । वे अम्बा… Read More