ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 64 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 64 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौंसठवाँ अध्याय देवी की पूजा का विधान, ध्यान, प्रतिमा की स्थापना, परिहार-स्तुति, शङ्ख में तीर्थों का आवाहन तथा देवी के षोडशोपचार पूजन का क्रम भगवान् नारायण कहते हैं — महाभाग नारद! राजा सुरथ ने जिस क्रम से देवी परा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 63 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 63 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तिरेसठवाँ अध्याय सुरथ और समाधि पर देवी की कृपा और वरदान नारदजी ने पूछा — वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ महाभाग नारायण ! अब कृपया यह बताइये कि राजा ने किस प्रकार से पराप्रकृति का सेवन किया था ? समाधि नामक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 62 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 62 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बाँसठवाँ अध्याय सुरथ और समाधि वैश्य का मेधस् के आश्रम पर जाना, मुनि का दुर्गा की महिमा एवं उनकी आराधना-विधि का उपदेश देना तथा दुर्गा की आराधना से उन दोनों के अभीष्ट मनोरथ की पूर्ति नारद बोले — राजा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 61 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 61 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकसठवाँ अध्याय बृहस्पति को तारा की प्राप्ति तथा बुध की उत्पत्ति नारद बोले — हे भगवन् ! उसके पश्चात् दैत्यों और देवों में क्या हुआ? यह रहस्य सुनने का मुझे बड़ा कौतूहल हो रहा है । नारायण बोले —… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 60 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 60 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ साठवाँ अध्याय तारा के उद्धार का उपाय – कथन नारद बोले — हे नारायण ! हे महाभाग ! आप वेद-वेदांग के पारगामी विद्वान् हैं, आपके मुखचन्द्र से निकले हुए आख्यान रूप अमृत का मैंने यथेच्छ पान किया । सम्प्रति… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 59 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 59 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनसठवाँ अध्याय बृहस्पति की कैलास-यात्रा कैलास-यात्रा नारद बोले — तारा का अपहरण हो जाने पर बहस्पति ने क्या किया – उस पतिव्रता को उन्होंने कैसे प्राप्त किया ? मुझे बताने की कृपा करें । श्री नारायण बोले — गुरु… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 58 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 58 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अठावनवाँ अध्याय तारा और चन्द्रमा का दोष निवारण नारद बोले — धार्मिकों में श्रेष्ठ राजा सुरथ किसके वंश में उत्पन्न हुआ ? और ज्ञानिप्रवर श्री मेधस् ऋषि से उसने कैसे ज्ञान प्राप्त किया ? हे ब्रह्मन् ! हे मुनिसत्तम… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 57 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 57 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सतावनवाँ अध्याय दुर्गाजी के सोलह नामों की व्याख्या, दुर्गा की उत्पत्ति तथा उनके पूजन की परम्परा का संक्षिप्त वर्णन नारदजी बोले — ब्रह्मन् ! मैंने अत्यन्त अद्भुत सम्पूर्ण उपाख्यानों को सुना। अब दुर्गाजी के उत्तम उपाख्यान को सुनना चाहता… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 56 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 56 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छप्पनवाँ अध्याय श्रीजगन्मङ्गल-राधाकवच तथा उसकी महिमा श्रीपार्वती बोलीं — श्रीराधा की पूजा का विधान और स्तोत्र अत्यन्त अद्भुत है, उसे मैंने सुन लिया । अब राधा-कवच का वर्णन कीजिये । आपकी कृपा से उसे भी सुनूँगी । श्रीमहेश्वर ने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 55 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 55 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पचपनवाँ अध्याय श्रीराधा के ध्यान, षोडशोपचार पूजन, परिचारिका पूजन, परिहार स्तवन, पूजन-महिमा तथा स्तुति एवं उसके माहात्म्य का वर्णन श्रीपार्वती ने पूछा — भगवन् ! आप पुरुषों के ईश्वर श्रीकृष्ण के मन्त्र के होते हुए उन वैष्णव नरेश सुयज्ञ… Read More