श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-50 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचासवाँ अध्याय कश्यप और अदिति का वसुदेव-देवकी के रूप में जन्म, कंस द्वारा देवकी के छः पुत्रों का वध, देवी का कृष्णरूप में देवकी के गर्भ से जन्म लेना और सिंहवाहिनीरूप में आकाश में स्थित हो कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी कर अन्तर्धान होना अथः… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-49 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनचासवाँ अध्याय भगवान् शिव का भगवती से पुरुषरूप में अवतार लेने की प्रार्थना करना तथा स्वयं राधा और आठ पटरानियों के रूप में अवतरित होने का आश्वासन देना, भगवती का स्वयं कृष्णरूप से तथा भगवान् विष्णु का अर्जुनरूप से अवतार लेने और महाभारत युद्ध में… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-48 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय श्रीराम और देवगणों द्वारा देवी का स्तवन, ब्रह्माजी द्वारा भगवती का पूजन, देवी के शारदीय पूजा-अनुष्ठान की अनिवार्यता अथः अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः देव्याः शारदीयपूजानुष्ठाने श्रीमद्रामायरणवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तदनन्तर श्रीरामचन्द्र जी दण्डवत् प्रणाम करके परम भक्ति से युक्त होकर प्रसन्नमन से भगवती की स्तुति करने… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-47 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय श्रीराम द्वारा भगवती जगदम्बिका का पूजन, कुम्भकर्ण, अतिकाय तथा मेघनाद का वध, श्रीराम का बिल्ववृक्ष में देवेश्वरी का पूजन करना, भगवती का श्रीराम को अमोघ अस्त्र प्रदान करना, रावणवध तथा श्रीराम की जय-जयकार अथः सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीरामरावणयोः संग्रामे रावणवधः श्रीमहादेव जी बोले —… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-46 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छियालीसवाँ अध्याय भगवती जगदम्बिका द्वारा शारदीय पूजा विधान का निरूपण तथा उसके माहात्म्य एवं फल का कथन अथः षट्चत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे शारदीयपूजाविधानकथनं श्रीदेवी जी बोली — इस प्रकार इस असमय के उपस्थित होने पर मेरी संतुष्टि के लिए तीनों लोकों के निवासियों को प्रत्येक वर्ष भगवती… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-45 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय श्रीराम की विजय हेतु ब्रह्माजी तथा देवगणों का देवी की आराधना करना, देवी द्वारा राक्षसों के वध का वरदान देना अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे ब्रह्मणा देवीस्तुतिवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — सुरश्रेष्ठ ब्रह्माजी बिल्ववृक्ष की छाया में भगवती जगदम्बिका का असमय में भी भक्तिपूर्वक पूजन… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-44 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौवालीसवाँ अध्याय श्रीराम द्वारा भगवती की स्तुति, प्रसन्न होकर जगदम्बा द्वारा विजय की आकाशवाणी करना, कुम्भकर्ण का युद्धभूमि में प्रवेश तथा श्रीराम के साथ उसका घोर युद्ध अथः चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीराम कुम्भकर्णयोर्युद्धवर्णनं ॥ श्रीराम कृत कात्यायनी स्तुति ॥ ॥ श्रीराम उवाच ॥ नमस्ते त्रिजगद्वन्द्ये संग्रामे… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-43 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी द्वारा श्रीराम से देवी की सर्वव्यापकता तथा विभिन्न दिव्य लोकों का वर्णन करना, देवी के लोक तथा उनके स्वरूप का वर्णन, श्रीराम द्वारा जगज्जननी जगदम्बा का पूजन अथः त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे दुर्गालोकवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — महामुने ! ब्रह्माजी के मुख से इस प्रकार… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-42 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बयालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का श्रीराम को कृष्णपक्ष में ही देवी की पूजा करने का आदेश देना तथा स्वयं के चतुर्मुख होने का पूर्वप्रसंग सुनाना, ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा देवी की स्तुति अथः द्विचत्वारिंशत्तमोध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे रामब्रह्मणोर्मन्त्रणावर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — तब भगवान् ब्रह्मा जी ने… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-41 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकतालीसवाँ अध्याय श्रीराम का ब्रह्माजी से विजयप्राप्ति का उपाय पूछना और ब्रह्माजी द्वारा उन्हें जगदम्बा की उपासना करने का परामर्श देना अथः एकचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे ब्रह्मरामचन्द्रयोरर्मन्त्रवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — इस प्रकार युद्ध में पराजित राक्षसों के स्वामी रावण ने युद्ध करने के लिए महाबलि कुम्भकर्ण… Read More