श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-135 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-135 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ पैंतीसवाँ अध्याय गजानन के वाहन मूषक के पूर्वजन्म का वर्णन अथः पञ्चत्रिंशोत्तरशततमोऽध्यायः क्रौञ्चशापवर्णनं व्यासजी ने कहा — हे पद्मज ! उस मूषक ने पूर्व में ऐसा क्या पाप और पुण्य किया था, जिसके कारण उसे मूषकयोनि तथा गजाननदेव के वाहकत्व की प्राप्ति हुई ? हे ब्रह्मन् ! मेरे… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-134 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-134 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पराशराश्रम में मूषक का प्रबल उपद्रव और गजानन का उसे दमित कर अपना वाहन बनाना अथः चतुस्त्रिंशाधिकशततमोऽध्यायः मूषकवाहनरूपधारणं ब्रह्माजी बोले — वह बालक अपनी लीलाओं के द्वारा माता-पिता को आनन्दित करता हुआ [महर्षि पराशर के आश्रम में] दिन- अनुदिन वैसे ही बढ़ने लगा, जैसे [शुक्लपक्ष में]… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-133 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-133 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तैंतीसवाँ अध्याय राजा वरेण्य के द्वारा गजमुखाकृति शिशु का भयभीत होकर वन में परित्याग और पराशरमुनि के द्वारा शिशु गजानन का पालन अथः त्रयस्त्रिंशोत्तरशततमोऽध्यायः पराशरदर्शनं व्यासजी बोले — हे विधे ! राजा वरेण्य के भवन में [उनकी भार्या] पुष्पिका के समीप [ नन्दी के द्वारा ] पहुँचाये गये… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-132 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-132 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ बत्तीसवाँ अध्याय सिन्दूर का गजानन को ले जाकर नर्मदा में फेंकना, गजानन के रक्त से रंजित शिलाओं की ‘नार्मद गणेश’ संज्ञा, उमामहेश्वर का कैलास-गमन अथः द्वात्रिंशोत्तरशततमोऽध्यायः कैलासाभिगमनं ब्रह्माजी बोले — एक बार की बात है, दैत्यराज सिन्दूर सभा में बैठा और अपने उन्मद अहंकार में भरकर कहने लगा… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-131 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-131 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ इकतीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर की आज्ञा से नन्दी का शिशु गजानन को वरेण्यपत्नी के पास ले जाना अथः एकत्रिशत्तरशततमोऽध्यायः गन्धर्वपराजय ब्रह्माजी बोले — तदुपरान्त भगवान् शिव विचार करने लगे कि इस बालक को किस प्रकार वहाँ ले जाया जाय ? उन (-के मनोभाव ) – को जानकर नन्दी… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-130 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-130 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ तीसवाँ अध्याय पार्वतीजी के गर्भ से गजानन का आविर्भाव तथा उनके विलक्षण स्वरूप को देखकर विस्मित पार्वती को शिवजी के द्वारा प्रबोधित किया जाना अथः त्रिंशाधिकशततमोऽध्यायः गजाननाविर्भाव ब्रह्माजी बोले — तदुपरान्त नौवाँ मास पूर्ण होते ही पार्वतीजी ने एक बालक का प्रसव किया। उस शिशु के सुन्दर नेत्र… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-129 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-129 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ उनतीसवाँ अध्याय सिन्दूर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं तथा ऋषियों द्वारा विनायक की स्तुति, दुःखप्रशमनस्तोत्र और उसका माहात्म्य, विनायक द्वारा सिन्दूर के वध का आश्वासन दिया जाना, माता पार्वती के गर्भ में तेजःपुंज का प्रकट होना, उस तेज से सन्तप्त पार्वती का भगवान् शिव तथा गणों के साथ… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-128 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-128 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का नारायण को सिन्दूरदैत्य के विषय में बताना, उसी समय सिन्दूर का वहाँ आना, भगवान् विष्णु के कहने पर सिन्दूर का भगवान् शिव से युद्ध करने कैलास पर जाना, शिव को ध्यानस्थ देखकर सिन्दूर का पार्वती का हरण करना, मयूरेश का द्विजरूप से उपस्थित होकर… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-127 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-127 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय गजानन-अवतार के प्रसंग में ब्रह्माजी की जँभाई से सिन्दूर की उत्पत्ति, ब्रह्माजी द्वारा उसे अनेक वरदानों की प्राप्ति, वरदानों की परीक्षा के लिये सिन्दूर का ब्रह्माजी को ही लक्ष्य बनाना और ब्रह्माजी का भयभीत होकर वैकुण्ठ जाना अथः सप्तविंशत्युत्तरशततमोऽध्यायः सिन्दूरोत्पत्तिवर्णनं व्यासजी बोले — हे चतुर्मुख ब्रह्माजी!… Read More
श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-126 श्रीगणेशपुराण-क्रीडाखण्ड-अध्याय-126 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ एक सौ छब्बीसवाँ अध्याय विवाह के अनन्तर मयूरेश का अपनी पुरी को प्रस्थान, मयूरेशपुरी का वर्णन, भाद्रपदमास के गणेशव्रत की विधि तथा उसकी महिमा, मयूरेश का द्वापरयुग में सिन्दूरवध के लिये पुनः अवतरित होने का आश्वासन देकर अन्तर्धान होना, ब्रह्माजी का एक सुन्दर प्रासाद को निर्मितकर उसमें गजानन प्रतिमा की… Read More