शत्रु-संहारक शाबर मन्त्र 02 शत्रु-संहारक शाबर मन्त्र 02 मन्त्रः- “तुमसे अरज करूँ, ऐ हो मात कालिका ! मोहि जो सतावे, सुख पावे न आठों याम । वाको तुम भक्ष लेओ, मेरी मात कालिका ! तुमसे अरज करूँ … ।। हाड़ तो हविष लेओ, खाल को खविष लेओ, गले पहिनो मात, आँतन की जालिका । तुमसे अरज करूँ … ।।… Read More
टोना लगाने का मन्त्र टोना लगाने का मन्त्र अगर किसी शत्रु के ऊपर टोना लगाना हो, तो निम्न लिखित मन्त्र को २१ बार नींबू के ऊपर पढ़कर चाकू से नींबू काटकर शत्रु के घर में फेंक दें । इससे शत्रु प्रताड़ित होगा । ‘अमुक’ की जगह शत्रु का नाम लेना चाहिए ।… Read More
बैरी-नाशन मन्त्र छत्तीसगढ के अनुभूत शाबर मन्त्र बैरी-नाशन मन्त्र विधि — एक निम्बू, (२) एक नारियल, (३) चुटकी भर सिन्दूर, (४) काले कपड़े का टुकड़ा, (५) बबूल के सात कांटे । अमा-वस्या के दिन उक्त मन्त्र का १०८ बार जप कर ११ बार गूगुल की धूप दें । फिर निम्बू पर शत्रु का नाम सिन्दूर से लिखकर,… Read More
महा-काली शाबर मन्त्र महा-काली शाबर मन्त्र मन्त्र :- “सात पूनम काल का, बारह बरस क्वाँर । एको देवी जानिए, चौदह भुवन – द्वार ।। १ द्वि – पक्षे निर्मलिए, तेरह देवन देव । अष्ट-भुजी परमेश्वरी, ग्यारह रुद्र सेव ।। २ सोलह कला सम्पूर्णी, तीन नयन भरपूर । दसों द्वारी तू ही माँ, पाँचों बाजे नूर ।। ३ नव-निधी… Read More
काली के प्रत्यक्ष दर्शन का मन्त्र काली के प्रत्यक्ष दर्शन का मन्त्र मन्त्रः- “काली-काली, महा-काली । इन्द्र की बेटी, ब्रह्मा की साली । हरी गोट, पीरी सारी । माँयके को (का) बाँध, सासरे (ससुराल) को (का) बाँध । औघट को (का) बाँध, गैल ( गली) को ( का) बाँध । बार-बार (बाल-बाल) में से, सोत-सोत (स्रोत-स्रोत) में से, बत्तीसउ दाँत में… Read More
क्लीं-बीज का अनुभूत प्रयोग क्लीं-बीज का अनुभूत प्रयोग एक फुट व्यास के गोल सफेद कागज पर पेंसिल से कागज के मध्य में लगभग चार अंगुल ऊँचा “क्लीं” बीजाक्षर लिखें । कागज के खाली भाग में कामनानुसार रङ्ग भरें । जैसे ‘लक्ष्मी-प्राप्ति’ के लिए पीला, ‘आकर्षण’ के लिए लाल, सभी तरह की ‘बीमारी’ के लिए ‘हरा रङ्ग’ । प्रातः-काल, प्रतिदिन,… Read More
दश महाविद्या जयन्ती दश महाविद्या जयन्ती १॰ श्री भुवनेश्वरी जयन्तीः- भाद्रपद शुक्ला द्वादशी, रविवार । २॰ श्री काली जयन्तीः- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्द्ध-रात्रि । ३॰ श्री ललिता जयन्तीः- माघ पूर्णिमा को प्रदोष समय । ४॰ श्री तारा जयन्तीः- चैत्र शुक्ल नवमी, शनिवार को मध्य रात्रि । ५॰ श्री छिन्न-मस्ता जयन्तीः- वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को अर्द्ध-रात्रि । ६॰… Read More
श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र नमस्कार मन्त्रः- श्रीमहा-विपरीत-प्रत्यंगिरा-काल्यै नमः। ।।पूर्व-पीठिका-महेश्वर उवाच।। श्रृणु देवि, महा-विद्यां, सर्व-सिद्धि-प्रदायिकां। यस्याः विज्ञान-मात्रेण, शत्रु-वर्गाः लयं गताः।। विपरीता महा-काली, सर्व-भूत-भयंकरी। यस्याः प्रसंग-मात्रेण, कम्पते च जगत्-त्रयम्।। न च शान्ति-प्रदः कोऽपि, परमेशो न चैव हि। देवताः प्रलयं यान्ति, किं पुनर्मानवादयः।। पठनाद्धारणाद्देवि, सृष्टि-संहारको भवेत्। अभिचारादिकाः सर्वेया या साध्य-तमाः क्रियाः।। स्मरेणन महा-काल्याः, नाशं जग्मुः सुरेश्वरि, सिद्धि-विद्या महा काली,… Read More
दर्शन हेतु श्री काली मन्त्र दर्शन हेतु श्री काली मन्त्र “डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड। प्रगट देवि, तुहि झुण्डन के झुण्ड। खगर दिखा खप्पर लियां, खड़ी कालका। तागड़दे मस्तङ्ग, तिलक मागरदे मस्तङ्ग। चोला जरी का, फागड़ दीफू, गले फुल-माल, जय जय जयन्त। जय आदि-शक्ति। जय कालका खपर-धनी। जय मचकुट छन्दनी देव। जय-जय महिरा, जय मरदिनी। जय-जय चुण्ड-मुण्ड भण्डासुर-खण्डनी, जय रक्त-बीज… Read More