सफलता पाने का मन्त्र सफलता पाने का मन्त्र “प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देव । सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब ।।”… Read More
वशीकरण के लिए मन्त्र वशीकरण के लिए मन्त्र “जो कह रामु लखनु बैदेही । हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही ।।”… Read More
हनुमान् जी की कृपा पाने का मन्त्र हनुमान् जी की कृपा पाने का मन्त्र “प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन । जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ।।”… Read More
रक्षा-कारी मन्त्र रक्षा-कारी मन्त्र सर्प से रक्षा हेतु मन्त्रः कहीं भी अचानक सर्प देखने पर निम्न-लिखित मन्त्र का उच्चारण करने से सर्प से रक्षा होती है। यदि पूरा श्लोक याद न हो, तो केवल “आस्तिक”- नाम उच्चारण करे। यदि घर में अचानक साँप निकलते हों, तो घर की दीवाल पर भी घी और सिन्दूर से यह श्लोक… Read More
महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहा-लक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः।… Read More
पितृ-आकर्षण मन्त्र पितृ-आकर्षण मन्त्र (कभी-कभी पितृ-पीड़ा से मनुष्य का जीवन दुःख-मय हो जाता है। निर्धारित कार्यों में बाधा, विफलता की प्राप्ति होती है। आकस्मिक दुर्घटनाएँ घटती है। पूरा कुटुम्ब दुःखी रहता है। ऐसी दशा में निम्नलिखित ‘प्रयोग’ करे। यह ‘प्रयोग’ निर्दोष है। पितृ-पीड़ा हो या न हो, सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट हो जाती है और सुख-शान्ति… Read More
प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का मन्त्र मन्त्र रामायण प्रभु श्रीराम की अनुकम्पा पाने का मन्त्र ” बन्दउँ नाम राम रघुबर को । हेतु कृसानु भानु हिमकर को ।।”… Read More
प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र मन्त्र रामायण प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र “मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन । जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन ।।”… Read More
बगलामुखी तन्त्रम् श्री बगलामुखी तन्त्रम् बगलामुखी देवी दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या का नाम से उल्लेखित है । वैदिक शब्द ‘वल्गा’ कहा है, जिसका अर्थ कृत्या सम्बन्ध है, जो बाद में अपभ्रंश होकर बगला नाम से प्रचारित हो गया । बगलामुखी शत्रु-संहारक विशेष है अतः इसके दक्षिणाम्नायी पश्चिमाम्नायी मंत्र अधिक मिलते हैं । नैऋत्य व पश्चिमाम्नायी मंत्र… Read More
भगवती स्वाहा (स्वाहा देवी) का उपाख्यान भगवती स्वाहा (स्वाहा देवी) का उपाख्यान श्रीब्रह्मवैवर्त्त-पुराण के प्रकृति-खण्ड के 40 वें अध्याय में भगवती ‘स्वाहा’ का सुन्दर उपाख्यान वर्णित है । नारदजी के पुछे जाने पर भगवान् नारायण कहते है – मुने ! सृष्टि के प्रारम्भिक समय की बात है – देवता भोजन की व्यवस्था के लिये ब्रह्मलोक की मनोहारिणी सभा में गये ।… Read More