राधामाधव प्रातः स्तवराज ॥ राधामाधव प्रातः स्तवराज ॥ प्रातः स्मरामि युगकेलिरसाभिषिक्तं वृन्दावनं सुरमणीयमुदारवृक्षम् । सौरीप्रवाहवृतमात्मगुणप्रकाशं युग्माङ्घ्रिरेणुकणिकाञ्चितसर्वसत्त्वम् ॥ १ ॥ जहाँपर सगुण हुए परमात्मा के दिव्य लीलागुणों का प्रकाश हुआ है, जो यमुनाजी के जलप्रवाह से आवेष्टित, अतीव रमणीय तथा वांछित फल देनेवाले वृकषों से समन्वित है और जिसमें अवस्थित सकल प्राणिसमुदाय युगल-स्वरूप की चरण-धूलिसे परिपूत है । राधामाधव-युगल… Read More
श्रीराधा-माधवप्रेम की प्राप्ति के लिये श्रीराधा-माधवप्रेम की प्राप्ति के लिये साधक भक्त स्नान करने के बाद श्रीराधामाधव-प्रेमप्राप्ति के लिये सर्वप्रथम भगवान् श्रीराधामाधव के युगलस्वरूपवाले किसी मनभावन चित्रपट को सामने रखकर उसका पंचोपचार पूजन करे, तत्पश्चात् शुद्ध वस्त्र धारणकर, शुद्ध आसन पर बैठकर श्रीमद्भागवत के निम्नलिखित चारों श्लोकों (१०। ३३ । २२-२५)-को, श्रीमद्भागवत के ही निम्नलिखित (१० । ३३ । ४०)… Read More
श्रीराधा-षडक्षरी महाविद्या की उपासना श्रीराधा-षडक्षरी महाविद्या की उपासना षडक्षरी महाविद्या-उपासनाके अन्तर्गत श्रीराधा-सम्बन्धी मन्त्र, ध्यान, पूजा-विधान और कवच आदि का यथाक्रम विवरण नारदपंचरात्र के द्वितीय रात्रि विभाग में तीसरे, चौथे और पाँचवें अध्याय में उपलब्ध होता है । श्रीशंकरजी का नारद के प्रति कथन है कि ‘श्रीराधा| [श्रीकृष्ण के] प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं ।’ ‘प्राणाधिष्ठात्री या देवी राधारूपा च… Read More
श्रीराधिका सहस्रनाम स्तोत्रम् (वासुदेवरहस्ये राधातन्त्रे ) ॥ अथ श्रीराधिका सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ इस सहस्रनाम स्तोत्र में पूर्णाभिषेक दीक्षा से मन्त्र व कर्म के ज्ञान हेतु कहा गया है । ॥ ईश्वरोवाच ॥ इति ते कथितं देवि किमन्यत् कथयामि ते । श्रोत्री त्वं परमेशानि अहं वक्ता च शाश्वतः ॥ ॥ देव्युवाच ॥ कियदन्यन्महादेव पृच्छामि यदिहोच्यते । हृदये तव देवेश नानातन्त्राणि सन्ति वै… Read More
श्रीराधिकासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ श्रीराधिकासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ देवदेव जगन्नाथ भक्तानुग्रहकारक । यद्यस्ति मयि कारुण्यं मयि यद्यस्ति ते दया ॥ १ ॥ यद्यत् त्वया निगदितं तत्सर्वं मे श्रुतं प्रभो । गुह्याद् गुह्यतरं यत्तु यत्ते मनसि काशते ॥ २ ॥ त्वया न गदितं यत्तु यस्मै कस्मै कदचन । तस्मात् कथय देवेश सहस्रं नाम चोत्तमम् ॥ ३ ॥ श्रीराधाया… Read More
श्रीराधा अष्टादशशतीनाम स्तोत्र ॥ श्रीराधा अष्टादशशतीनाम स्तोत्र ॥ राधा ने वृन्दा से कहा कि तुम मेरे जन्म एवं समागम के बारे में कुछ नहीं जानती और न ही तुम मेरे नाम प्रभाव को जानती हो । वृन्दा ने जब उनके नाम प्रभाव को जानना चाहा तो राधा ने अपने १८०० नाम बताये । श्रीराधा के ये १८०० नाम… Read More
भुवनेश्वरीकृत राधास्तुतिः ॥ अथ भुवनेश्वरीकृत राधास्तुतिः॥ राधा ने भुवनेश्वरी को स्मरण कर वृन्दावन को गोलोकमय बनाने को कहा तब भुवनेश्वरी ने राधा की महिमा वर्णन करते हुए प्रशंसापूर्वक कहा कि राधा आप त्रिभुवन की स्वयं लक्ष्मी हो । उसका यथा वर्णन — ॥ ब्राह्मणी उवाच ॥ ततः किमभवत् पश्चाद् देवगन्धर्व कथ्यताम् । पुनीहि मे श्रुतिपुटौ नानादोषकुलाकुलौ ॥… Read More
त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ राधा ने त्रिपुर सुन्दरी की उपासना की कि हे मां मेरी सहायता करो तथा त्रिपुरसुन्दरी ने अपनी वशिन्यादि दूतियों को सहायता करने को कहा तब वशिन्यादि ने राधा की प्रशंसा व स्तुति की । यथा — जय जय राधे कृतनतराधे जगदभिवन्द्ये सुरवरवन्द्ये । धृतबहुरूपे स्मरमखरूपे सरसिजवक्त्रे सुमदिरनेत्रे ॥ जय… Read More
श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ अथ श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ मुनीन्द्र-वृन्द-वन्दिते त्रिलोक-शोकहारिणि, प्रसन्न-वक्त्र-पङ्कजे निकुञ्ज-भूविलासिनि । व्रजेन्द्र-भानुनन्दनि व्रजेन्द्र सूनुसङ्गते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ १ ॥ अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते, प्रवाल-बाल)-पल्लव-प्रभारुणाङ्घ्रिकोमले । वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ २ ॥… Read More
श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ अथ श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ इस कवच स्तोत्र में राधा को दशमहाविद्या प्रधान त्रिपुरसुन्दरी की दूती बताया गया है, अत: महाविद्या यह महाविद्या नहीं होकर तन्त्रानुसार उपमहाविद्या है । ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ देवदेव महादेव सृष्टिस्थित्यन्तकारक । राधिकाकवचं देव कथयस्व दयानिधे ॥ १ ॥ ॥ ईश्वरोवाच ॥… Read More