शरीर रक्षा शाबर मन्त्र 03 शरीर रक्षा शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिण्ड हमारा बैठा । ईश्वर कुञ्जी, ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों याम का यति हनुमन्त रखवाला ।” प्रयोग एवं विधिः-… Read More
शरीर रक्षा शाबर मन्त्र 02 शरीर रक्षा शाबर मन्त्र ‘मन्त्र-विद्या’ का प्रयोग करने वाले को देहाती भाषा में ‘ओझा’ कहते हैं : ‘ओझा’ भी जब झाड़-फूँक ले लिए कहीं जाता है, तो घर से चलते समय या उस स्थान पर पहुँच कर सबसे पहले अपने शरीर की रक्षा के लिए शरीर-रक्षा का मन्त्र पढ़ लेता है, जिससे यदि उस स्थान… Read More
शरीर रक्षा शाबर मन्त्र 01 शरीर रक्षा शाबर मन्त्र ‘मन्त्र-विद्या’ का प्रयोग करने वाले को देहाती भाषा में ‘ओझा’ कहते हैं : ‘ओझा’ भी जब झाड़-फूँक ले लिए कहीं जाता है, तो घर से चलते समय या उस स्थान पर पहुँच कर सबसे पहले अपने शरीर की रक्षा के लिए शरीर-रक्षा का मन्त्र पढ़ लेता है, जिससे यदि उस स्थान… Read More
बजरंग की कैंची (प्रयोगों की काट) बजरंग की कैंची (प्रयोगों की काट) मन्त्रः- “फजले बिस्मिल्ला रहमान, अटल खुरजी तेज खुरान । घड़ी-घड़ी में निकलै बान । लालो लाल कमान, राखवाले की जबान । खाक माता खाक पिता । त्रिलोकी की मिसैली । राजा – प्रजा पड़ै मोहिनी । जल देखै, थल कतरै । राजा इन्द्र की आसन कतरै । तलवार की… Read More
बाधा-निवारक शाबर मन्त्र बाधा-निवारक शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ-कार गुरु गोविन्द को नमस्कार । चलु चलु सब देवतन की शक्ति । भूत-प्रेत-पिशाच, कुल-दोष, गोत्र-वध, चमर-दोष कुल मह, केहू कर मारा मुवा वा, मुवा मिरचुक केतहू कर, किहा आइ होइ, नन औरेक, अजि औरेक, ससुरारीक, बैताल, जोगनी चरी चमारी, देव-दानव, भैरो-भवानी, मरी-मसान, हड़न्त, गड़न्त, भूत-प्रेत, शाकिनी, डाकिनी, तर धरती कर… Read More
अन्न-पूर्णा देवी का सिद्ध मन्त्र अन्न-पूर्णा देवी का सिद्ध मन्त्र मन्त्रः- “ॐ सत्त नाम का सभी पसारा, धरन गगन में जो वर तारा । मन की जाप जहाँ लग आखा, तहँ-तहँ सत्त नाम की राखा । अन्न-पूरना पास गई बैठाली, थुड़ी गई खुसाली । चिनत मनी कलप तराये, काम-धेनु को साथ लियाये । आया आप कुबेर भण्डारी, साथ लक्ष्मी आज्ञाकारी… Read More
अघोर शाबर मन्त्र अघोर शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरु । घोर-घोर, काजी की कुरान घोर, मुल्ला की बांग घोर, रेगर की कुण्ड घोर, धोबी की चूण्ड घोर, पीपल का पान घोर, देव की दीवाल घोर । आपकी घोर बिखेरता चल, पर की घोर बैठाता चल । वज्र का कीवाड़ जोड़ता चल, सार का कीवाड़ तोड़ता चल… Read More
भैरव शाबर मन्त्र भैरव शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके, तुम मेरा कारज करो तुरत । कमर विराज मस्तंगा लँगोट, घूँघर-माल । हाथ बिराज डमरु खप्पर त्रिशूल । मस्तक बिराज तिलक सिन्दूर । शीश बिराज जटा-जूट, गल बिराज नोद जनेऊ । ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके तुम मेरा… Read More
सर्व-कार्य-सिद्धि-प्रद शाबर भैरव मन्त्र सर्व-कार्य-सिद्धि-प्रद शाबर भैरव मन्त्र श्री काल-भैरव बटुक प्रयोग ॐ अस्य श्री वटुक-भैरव-स्तोत्रस्य सप्त-ऋषिः ऋषयः, मातृका छन्दः, श्रीवटुक-भैरो देवता, ममेप्सित-सिद्धयर्थ जपे विनियोगः । “ॐ काल-भैरौ, वटुक भैरौ, भूत-भैरौ ! महा-भैरव महा-भय-विनाशनं देवता-सर्व-सिद्धिर्भवेत् । शोक-दुःख-क्षय-करं निरञ्जनं, निराकारं नारायणं, भक्ति-पूर्ण त्वं महेशं । सर्व-काम-सिद्धिर्भवेत् । काल-भैरव, भूषण-वाहनं काल-हन्ता रुपं च, भैरव गुनी । महात्मनः योगिनां महा-देव-स्वरुपं । सर्व… Read More
हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग ।। श्री पार्वत्युवाच ।। हनुमच्छावरं मन्त्रं, नित्य-नाथोदितं तथा । वद मे करुणा-सिन्धो ! सर्व-कर्म-फल-प्रदम् ।। ।। श्रीईश्वर उवाच ।। आञ्जनेयाख्यं मन्त्रं च, ह्यादि-नाथोदितं तथा । सर्व-प्रयोग-सिद्धिं च, तथाप्यत्यन्त-पावनम् ।। ।। मन्त्र ।। “ॐ ह्रीं यं ह्रीं राम-दूताय, रिपु-पुरी-दाहनाय अक्ष-कुक्षि-विदारणाय, अपरिमित-बल-पराक्रमाय, रावण-गिरि-वज्रायुधाय ह्रीं स्वाहा ।।” विधिः- ‘आञ्जनेय’ नामक उक्त मन्त्र का प्रयोग… Read More