शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का ‘रुद्रशिर’ नाम पड़ने का कारण, सती एवं शिव का विवाहोत्सव, विवाह के अनन्तर शिव और सती का वृषभारूढ़ हो कैलास के लिये प्रस्थान नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! हे शिवभक्त… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय शिव का सती के साथ विवाह, विवाह के समय शम्भु की माया से ब्रह्मा का मोहित होना और विष्णु द्वारा शिवतत्त्व का निरूपण ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार कन्यादानकर दक्ष ने भगवान् शंकर को अनेक प्रकार के… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय देवताओं और मुनियोंसहित भगवान् शिव का दक्ष के घर जाना, दक्ष द्वारा सबका सत्कार एवं सती तथा शिव का विवाह नारदजी बोले — जब आप भगवान् रुद्र के पास गये, तब क्या चरित्र हुआ, हे तात ! कौन-सी बात… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय भगवान् शिव द्वारा सती को वर-प्राप्ति और शिव का ब्रह्माजी को दक्ष प्रजापति के पास भेजना ब्रह्माजी बोले — इस प्रकार मैंने सभी देवताओं के द्वारा की गयी शिवजी की उत्तम स्तुति को आपसे कह दिया । हे मुने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय ब्रह्मा और विष्णु द्वारा शिव से विवाह के लिये प्रार्थना करना तथा उनकी इसके लिये स्वीकति ब्रह्माजी बोले — भगवान् विष्णु आदि देवताओं द्वारा की गयी स्तुति को सुनकर सबकी उत्पत्ति करनेवाले भगवान् शंकर बड़े प्रसन्न हुए और जोर… Read More


॥ वीरभद्र मंत्र प्रयोगः ॥ शत्रुनाश हेतु विशेष प्रयोग विधि भैरव प्रपंचसार तंत्र व आकाशभैरव कल्पादि तंत्रो में देखें। विनियोग:- अस्य श्री वीरभद्र मंत्रस्य ब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छंदः, वीरभद्रोदेवता सर्वशत्रुक्षयार्थे जपे विनियोगः । मंत्र: – (३२ अक्षरात्मक) “ॐ वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोपं सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा ।” षडङ्गन्यासः – ॐ वीरभद्राय हृदयाय नमः । अतिक्रूराय शिरसे… Read More


॥ महाशास्ता (हरिहरपुत्र) मंत्र प्रयोगः ॥ जिस तरह वास्तुपुरुष की उत्पति अंधकदैत्य व शिव के बीच युद्ध समय में दोनों के पसीने की बूंदे भूमि पर गिरी उससे हुई इसी तरह किसी अन्यप्रकरण में यह हरि एवं हर का मानस है पुत्र एवं इसकी गणना विशेष शिवगणों में की जाती है । अय्यप्पा स्वामी मोहिनी… Read More


॥ तुम्बुरू शिव ॥ (शारदा तिलक) एकाक्षर मंत्र: – ( मंत्रोद्धार) क्षकारोमाग्नि पवनवामकर्णार्द्ध चन्द्रवान । क्ष्+म्+र्+यूँ = क्ष्म्र्यूँ विनियोग – अस्य मंत्रस्य काश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः, तुम्बुरू शिव देवता, रं बीजं, ॐ शक्तिं सर्वसमृद्धि हेतुवे जपे विनियोगः । षड़ङ्गन्यासः – षड् दीर्धभाजा बीजेन षड़ङ्गानिप्रकल्पयेत् । अर्थात बीज मंत्र के षड् दीर्घो से न्यास करें यथा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय सती द्वारा नन्दा-व्रत का अनुष्ठान तथा देवताओं द्वारा शिवस्तुति ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! एक समय आपके साथ जाकर मैंने त्रिलोकी की सर्वस्वभूता उन सती को अपने पिताके पास बैठी हुई देखा ॥ १ ॥ पिता के द्वारा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय दक्ष की साठ कन्याओं का विवाह, दक्ष के यहाँ देवी शिवा (सती)-का प्राकट्य, सती की बाललीला का वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे देवमुने ! इसी समय मैं लोकपितामह ब्रह्मा भी इस चरित्र को जानकर प्रीतिपूर्वक शीघ्रता से वहाँ पहुँचा… Read More