॥ अथ शरभ मालामन्त्रम् ॥ माला विनियोग मंत्रः- अस्य मंत्रस्य कालाग्नि रुद्र ऋषिः अति जगती छन्दः श्री शरभेश्वरो देवता, खं बीजं , स्वाहा शक्तिः:, फट् कीलकं चतुर्विध पुरूषार्थ सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ॥ ध्यानम् ॥ चन्द्रार्काग्निस्त्रिदृष्टि कुलिशवरनखश्चञ्चलोऽत्युग्र जिह्वः । काली दुर्गा च पक्षौ हृदय जठरगो भैरवो वाडवाग्निः ॥ ऊरूस्थौ-व्याधिमृत्युशरभवरखगरचश्चण्ड – वातातिवेगः । संहर्ता-सर्वशत्रून स जयति… Read More


॥ रुद्रसूक्त ( नीलसूक्त) ॥ भूतभावन भगवान् सदाशिव की प्रसन्नता के लिये रुद्रसूक्त पाठ का विशेष महत्त्व बताया गया है । पूजा में भगवान शंकर को सबसे प्रिय जलधारा है । इसलिये भगवान् शिव के पूजन में रुद्राभिषेक की परम्परा है और अभिषेक में इस ‘रुद्रसूक्त’ की ही प्रमुखता है । रुद्राभिषेक के अन्तर्गत रुद्राष्टाध्यायी… Read More


कण्ठवेल पीड़ा मुक्ति मन्त्र – विधिः— किसी भी नवरात्रों में प्रतिदिन एक माला जप कर उपरोक्त मंत्र को सिद्ध करलें। फिर आवश्यकता पड़ने पर रोगी को मोरपंख से झाड़ें । सोमवार से रविवार तक प्रतिदिन सात बार झाड़ देने से कण्ठवेल सूख जाती है और रोगी को पूर्ण लाभ मिलता है । मन्त्रः- “ओम नमो… Read More


रक्षा का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आदेश, गुरु जी को आदेश । वज्र की कोठड़ी, वज्र किवाड़ा वज्र छायों, दसों द्वारा । गणेश सौंगली, शेष कुण्डा । ब्रह्मा कुञ्जी, विष्णु ताला । भोले शङ्कर की चौकी, भैरों बलि, हनुमन्त वीर का पहरेदारा । जो इस घट-पिण्ड पर करे घाव, तो शिव-शक्ति की फिरे दुहाई । मेरी… Read More


दिशा, स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “काला गुरू, धर धतूर तै । जान बास – बसेरु, अमली खेरु । वन देउता आकासे लाग, दशो दिशा दशो देउता । मोरे गुरू, तोर गुरू । मै जानो शपथ साँची । कहु राख धरू मार, बन्धान पर ओर – छोर । मोर देउता, गौरा पार्वती, महादेव की… Read More


भूतादि भगाने का अनुभूत मन्त्र “ॐ गुरु जी ! काला भैरू क्या करे ? मरा मसान सेवे । मरा मसान से के क्या करे ? लाग को – लपट को, काचे को – कलवे को । झाँप को – झपट को, भूत को – प्रेत को ! जिन्द को – डाकन को, ताल को –… Read More


शिव-साबर १. सर्प-विष-हरण मन्त्र “गौरा खेती, शिव की बारी । महादेव तेरी रखवारी । दाव चलावे, दाव बाँधे । पाव चलावें, पाव बाँधे । तलवार चलावे, धार बाँधे । अखाड चलाये, जवान बाँधे । मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति । दोहाई नरसिंह, दोहाई गौरा पार्वती की, लाख दोहाई, हो गुरु बङ्गाली !”… Read More


व्यपोहन स्तव लिंगपुराण के ८२वें अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण स्तव आया है, जिसका नाम है –“व्यपोहनस्तव” । व्यपोहन शब्द में ‘वि’ उपसर्ग है, जिसका अर्थ है ‘विशेषरुप से’ । ‘अपोहन’ का अर्थ है, ‘दूर हटाना या छिपाना’ । सूतजी ऋषियों से कहते हैं कि मैं अब आप लोगों को एक ऐसे स्तव (स्तोत्र, स्तुति) –… Read More


श्रीमहा-मृत्युञ्जय-कवच ।।पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच।। श्रृणुष्व परमेशानि ! कवचं मन्मुखोदितम् । महा-मृत्युञ्जयस्यास्य, न देवं परमाद्भुतम् ।।१ यं धृत्वा यं पठित्वा च, श्रुत्वा च कवचोत्तमम् । त्रैलोक्याधिपतिर्भूत्वा, सुखितोऽस्मि महेश्वरि ! ।।२ तदेव वर्णयिष्यामि, तव प्रीत्या वरानने । तथापि परमं तत्त्वं, न दातव्यं दुरात्मने ।।३… Read More


सहस्त्राक्षर-मृत्युञ्जय-मालामन्त्र “ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमन्त्ररुपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरुपाय सर्वतत्त्विदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय दक्षाध्वजध्वंसकाय महाकालभेदकाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनायानेक-कोटिब्रह्माण्डनायकान्त… Read More