श्रीमहादेव-प्रोक्तं-मृत-सञ्जीवनी-कवचम् श्रीमहादेव-प्रोक्तं-मृत-सञ्जीवनी-कवचम् विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमृतसञ्जीवनीकवचस्य श्री महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमृत्युञ्जयरुद्रो देवता ॐ बीजं, जूं शक्तिः, सः कीलकम् मम (अमुकस्य) रक्षार्थं कवचपाठे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्री महादेव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीमृत्युञ्जयरुद्रो देवतायै नमः हृदि, ॐ बीजाय नमः गुह्ये, जूं शक्तये नमः पादयो, सः कीलकाय नमः नाभौ, मम (अमुकस्य) रक्षार्थं कवचपाठे विनियोगाय नमः… Read More
महामृत्युञ्जयस्तोत्रम् महामृत्युञ्जयस्तोत्रम् विनियोग- ॐ अस्य श्री महा-मृत्युञ्जय-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीमार्कण्डेय ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमृत्युञ्जयो देवता, गौरी शक्तिः, मम सर्वारिष्ट-समस्त-मृत्यु-अपमृत्यु-शान्त्यर्थं च जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यास- श्रीमार्कण्डेय ऋषये नमः शिरसि। अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे। श्रीमृत्युञ्जयो देवतायै नमः हृदि। गौरी शक्तये नमः नाभौ। मम सर्वारिष्ट-समस्त-मृत्यु-अपमृत्यु-शान्त्यर्थं च जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे। ध्यान- चन्द्रार्काग्नि-विलोचनं स्मित-मुखं पद्म-द्वयान्तः-स्थितम्। मुद्रा-पाश-मृगाक्ष-सूत्र-विलसत्पाणिं हिमांशु-प्रभम् | कोटीन्दु-प्रगलत्सुधाऽऽप्लुत-तनुं हारादि-भूषोज्ज्वलं कान्तं विश्व-विमोहनं पशुपतिं… Read More
श्रीगिरिजा दशक: एक सिद्ध प्रयोग ‘श्रीगिरिजा दशक’: एक सिद्ध प्रयोग बैल पर बैठे हुए शिव पार्वती का ध्यान कर माँ पार्वती से दया की भीख माँगनी चाहिए। जैसे सन्तान पेट दिखाकर माता से माँगती है, वैसे ही माँगना चाहिए। कल्याण की इच्छा होगी तो माँ अवश्य सर्वतोमुखी कल्याण करेगीं।… Read More
मृत्य्वष्टकम् मृत्य्वष्टकम् ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् । प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १ गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् । केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २ वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् । दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३… Read More
मृत्युञ्जय कवच मृत्युञ्जय-कवच विनियोगः ॐ अस्य मृत्युञ्जयकवचस्य वामदेव ऋषिः गायत्रीछन्दः मृत्युञ्जयो देवता साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोग। ऋष्यादि-न्यासः वामदेव ऋषये नमः शिरसि, गायत्रीछन्दसे नमः मुखे, मृत्युञ्जयो देवतायै नमः हृदि, साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे। करहृदयादि-न्यासः- ॐ जूं सः (इस मन्त्र से सभी न्यास करें) ध्यानः हस्ताभ्यां कलश-द्वयामृत-रसैराप्लावयन्तं शिरो, द्वाभ्यां तौ दधतं मृगाक्ष-वलये द्वाभ्यां वहन्तं परम्। अङ्क-न्यस्त-कर-द्वयामृत-घटं कैकाश-कान्तं शिवम्, स्वच्छाम्भोज-गतं… Read More
मृत-सञ्जीवनी-कवचम् श्रीमहादेव-प्रोक्तं-मृत-सञ्जीवनी-कवचम् ।। पूर्व-पीठिका ।। एवमाराध्य गौरीशं देवं मृत्युञ्जयमहेश्वरं । मृतसञ्जीवनं नाम्ना कवचं प्रजपेत् सदा ॥१॥ सारात् सार-तरं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतरं शुभं । महादेवस्य कवचं मृतसञ्जीवनामकं ॥ २॥ समाहित-मना भूत्वा श्रृणुष्व कवचं शुभं । श्रृत्वैतद्दिव्य कवचं रहस्यं कुरु सर्वदा ॥३॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमृतसञ्जीवनीकवचस्य श्री महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमृत्युञ्जयरुद्रो देवता ॐ बीजं, जूं शक्तिः, सः कीलकम्… Read More
श्री शिव-शत-नाम श्री शिव-शत-नाम ।। पूर्व-पीठिका ।। ।। श्री देव्युवाच ।। देव-देव महादेव ! संसारार्णवतारक ! शिव-लिंगार्चनं देव ! कृपया कथय प्रभो ! ।। श्री शंकर उवाच ।। श्रृणु देवि ! प्रवक्ष्यामि, यन्मत्त्वं परि-पृच्छसि । मम नाम-शतं चैव, कलौ पुण्य-फल-प्रदम् ।। यस्य स्मरण-मात्रेण, संसारान्मुच्यते नरः ।। अति गुह्यं महा-पुण्यं, यव स्नेहात् प्रकाशितं । गोपनीयं प्रयत्नेन, न प्रकाश्यं… Read More
ऋण-परिहारक प्रदोष व्रत ऋण-परिहारक प्रदोष व्रत ‘प्रदोष व्रत’ के दिन प्रातः स्नानादि के भगवान् शंकर का यथाशक्ति पञ्चोपचार या षोडशोपचार से पूजन करें। फिर निम्नलिखित ‘विनियोग’ आदि कर निर्दिष्ट मन्त्र का यथा-शक्ति २१ या ११ माला जप करे। संभव न हो, तो एक ही माला या केवल ११ बार जप करे। जितना अधिक जप होगा, उतना ही प्रभावी… Read More
भूतनाथ जी की महिमा भूतनाथ जी की महिमा सम्राट् अकबर के समय की घटना है । उस समय से पहले मुर्शिदाबाद और मालदा का प्रान्त गौड़ देश के अन्तर्गत था और गौड़ देश के हिन्दू राजाओं के शासन में था । यह प्रसिद्ध ही है कि अकबर गुण-ग्राही सम्राट् था और हिन्दू-मुसलमान दोनों का, गुणों के अनुसार, समान रुप… Read More
अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच भगवान् शिव का प्रस्तुत कल्याणकारी कवच अत्यन्त छोटा है और प्रायः अनुभूत है । आशा है, भक्त-जन इसका प्रातः-काल नित्य-पाठ कर इससे लाभ उठाएँगे । इस कवच के पाठ से सभी कामनाओं की पूर्ति एवं सर्व प्रकार से रक्षा होती है । ।।श्रीदेवी उवाच।। भगवन् देव-देवेश ! सर्वाम्नाय-प्रपूजित! सर्वं मे कथितं देव… Read More