तरिगोंडा वेंगमाम्बा भक्त जब कवि बनता है या कवि में जब भक्ति का उदय होता है, तब काव्य का सृजन ही नहीं होता, बल्कि काव्य के माध्यम से भक्ति का भी विकास होता है । भक्त-कवियों की कृतियाँ एवं उनके व्यक्तित्व ही इसके साक्ष्य हैं । आन्ध्र की मीरा समझी जाने वाली तरिगोंडा वेंगमाम्बा इसी… Read More