June 27, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 180 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ एक सौ अस्सीवाँ अध्याय पञ्चमी तिथि के व्रत पञ्चमीव्रतानि अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं आरोग्य, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाले पञ्चमी-व्रत का वर्णन करता हूँ। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के शुक्लपक्ष की पञ्चमी को वासुकि, तक्षक, कालिय मणिभद्र ऐरावत, धृतराष्ट्र, कर्कोटक और धनंजय नामक नागों का पूजन करना चाहिये ॥ १-२ ॥’ ये सभी नाग अभय, आयु, विद्या, यश और लक्ष्मी प्रदान करनेवाले हैं ॥ ३ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘पञ्चमी के व्रतों का वर्णन’ नामक एक सौ अस्सीवों अध्याय पूरा हुआ ॥ १८० ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe