July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 290 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नब्बेवाँ अध्याय अश्व-शान्ति अश्व-शान्ति शालिहोत्र कहते हैं — सुश्रुत! अब मैं घोड़ों के रोगों का मर्दन करने वाली ‘अश्वशान्ति’ का वर्णन करूंगा; जो नित्य, नैमित्तिक और काम्य के भेद से तीन प्रकार की मानी गयी है; इसे सुनो। किसी शुभ दिन को श्रीधर (विष्णु), श्री (लक्ष्मी) तथा उच्चैःश्रवा के पुत्र हयराज की पूजा करके सविता देवता-सम्बन्धी मन्त्रों द्वारा घी का हवन करे। तदनन्तर ब्राह्मणों को दक्षिणा दे। इससे अश्वों की वृद्धि होती है। (शुभ दिन से आरम्भ करके इस कर्म को प्रतिदिन चालू रखा जाय तो यह ‘नित्य अश्व-शान्ति’ है) ॥ १-२१/२ ॥’ (अश्व-समृद्धि की कामना से) आश्विन के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को नगर के बाह्यदेश में शान्ति-कर्म करे। उसमें विशेषतः अश्विनीकुमारों तथा वरुण देवता का पूजन करे। तत्पश्चात् श्रीदेवी को वेदी पर पद्मासन के ऊपर अङ्कित करके उन्हें चारों ओर से वृक्ष की शाखाओं द्वारा आवृत कर दे। उनकी सभी दिशाओं में समस्त रसों से परिपूर्ण कलशों को वस्त्रसहित स्थापित करे। इसके बाद श्रीदेवी का पूजन करके उनकी प्रसन्नता के लिये जौ और घी का हवन करे। फिर अश्विनीकुमारों और अश्वों की अर्चना करे तथा ब्राह्मणों को दक्षिणा दे। (यह काम्य शान्ति हुई)। अब नैमित्तिक शान्ति का वर्णन सुनो ॥ ३-५१/२ ॥ मकर आदि की संक्रान्तियों में अश्वों का पूजन करे। साथ ही कमलपुष्पों द्वारा विष्णु, लक्ष्मी, ब्रह्मा, शंकर, चन्द्रमा, सूर्य, अश्विनीकुमार, रेवन्त तथा उच्चैःश्रवा की अर्चना करे। इसके सिवा कमल के दस दलों पर दस दिक्पालों की भी पूजा करे। प्रत्येक अर्चनीय देवता के निमित्त वेदी पर जलपूर्ण कलश स्थापित करे और उन कलशों में अधिष्ठित देवों की पूजा करे। इन देवताओं के उत्तरभाग में इन सबके निमित्त तिल, अक्षत, घी और पीली सरसों की आहुतियाँ दे। एक-एक देवता के निमित्त सौ-सौ आहुतियाँ देनी चाहिये। अश्वसम्बन्धी रोगों के निवारण के लिये उपवास पूर्वक यह शान्ति कर्म करना उचित है ॥ ६-८ ॥ ॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘अश्व शान्ति का कथन’ नामक दो सौ नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २९० ॥ Content is available only for registered users. Please login or register Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe