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अष्टा-विंशत्यक्षर वीरवर-गणपति
मन्त्रः- “ह्रीं क्लीं वीर-वर-गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट् ।”

vadicjagat‘मंत्र-महार्णव’ में उल्लेखित उक्त मन्त्र का रक्त-वस्त्र पहन कर, रक्त-चन्दन का त्रिपुण्ड लगा कर १२ सहस्र जप करें । फिर प्रतिदिन पञ्चामृत से स्नान कर १०८ बार जप करें ।
उक्त मन्त्र के जप करने से अष्ट-सिद्धियाँ प्राप्त होती है ।

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