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गृह-रक्षा के लिए
मन्त्र :-
“ॐ ह्रीं चण्डे ! चामुण्डे ! भ्रुकुटि-अट्टाट्‌टे ! भीम- दर्शने ! रक्ष रक्ष चौरेभ्य:, वज्रेभ्यः, अग्निभ्यः, श्वापदेभ्यः, दुष्ट-जनेभ्यः, सर्वेभ्यः:, सर्वोपद्रवेभ्यः, गण्डी:, ह्रीं ह्रीं ठः ठः ।”

om, ॐ
विधि : गाय का गोबर या मन-पसन्द रङ्ग का घोल लेकर उक्त मन्त्र १०८ बार पढ़कर अभिमन्त्रित कर उससे घर के चारों ओर रेखा खींच दें । ऐसा कर देने पर घर में चोर – डाकुओं के घुसने का भय, अग्नि – भय, हिंसक जन्तु – भय, वज्र-भय और दुष्ट मनुष्यों के प्रवेश का भय नहीं रहता ।

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