ब्रह्मादि देवों द्वारा भगवान् की स्तुति
जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता ।
गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रिय कंता ।।

पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई ।
जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई ।।

ram panchaytan
जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा ।
अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा ।।

जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगत मोह मुनिबृंदा ।
निसि बासर ध्यावहिं गुनगन गावहिं जयति सच्चिदानंदा ।।

जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा ।
सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा ।।

जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरुथा ।
मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा ।।

सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहिं जाना ।
जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना ।।

भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा ।
मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पसकंजा ।।

जानि सभय सुरभुमि सुनि बचन समेत सनेह ।
गगन गिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह ।।

रक्ताम्भोजदलाभिरामनयनं पीताम्बरालं कृतम् ,
श्यामांग द्विभुजं प्रसन्नवदनं श्रीसीतया शोभितम् ।
कारुण्यामृतसागरं प्रियगणैर्भ्रात्रादिभिर्भावितं,
वन्दे विष्णुशिवादिसेव्यमनिशं भक्तेष्टसिद्धिप्रदम् ।।

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