रक्षा-कारक मन्त्र
मन्त्रः- “नागौरी से सुलतान, मुहम्मद से जोद्धा, बडे खुदाय काम । चारों चक्र हनुमान जोद्धे ने मारे । मस्तक में सिन्दूर लगाऊँ । सवा सेर का रोट चढाऊं । मैं करूँ हिन्दी का पाठ । घरेर – घार कर लगा लगाया, भेजा – भेजाया सब गुर्ज के बस में कर । पहली हक्का कौन चले ? गनिहर भैरों । दूजी हक्का कौन चले ? ख्वाजा पीर । तीजी हक्का कौन चले ? काली माई । चौथी हक्का हनुमान वीर चले । लगा- लगाया, भेजा भेजाया, हिन्दु- मुसलमान, जात – कुजात के मन्त्र को बन्द कर । न करे, तो माता अञ्जनी का पिया दूध हराम करे । मेरी भक्ति, गुरू की शक्ति । चले मन्त्र, फुरे वाचा ।”

vaficjagat
विधि — ग्रहण-काल अथवा होली दीवाली के समय इस मन्त्र को आरम्भ करके एक हजार जप करे । इसके बाद इस मन्त्र से विभूति आदि बनाकर देने से आभिचारिक बाधा की शान्ति होती है ।

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