वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र

मन्त्र:-
“सोइ जल अनल संघाता ।
होइ जलद जग जीवनदाता ।।”

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मन्त्र की प्रयोग विधि और लाभः-

इस मन्त्र को प्रतिदिन एक सौ आठ बार जपते हुए 90 दिन पूर्ण करें । जब वर्षा करवानी हो तब जल के मध्य खड़े होकर 10000 जप करें और आकाश की तरफ जल के छींटे दें ।
रोगनाश के लिए काँसे की कटोरी में जल भरकर इस मन्त्र से 108 बार शक्तिकृत करके रोगी को पिला दें ।

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