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स्वास्थ्य के लिये टोटके

1॰ सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।

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2॰ हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर ॐ नम: शिवाय´´ बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें।

3॰ जिन लोगों को 1-2 बार दिल का दौरा पहले भी पड़ चुका हो वे उपरोक्त प्रयोग संख्या 2 करें तथा निम्न प्रयोग भी करें :-

एक पाचंमुखी रूद्राक्ष, एक लाल रंग का हकीक, 7 साबुत (डंठल सहित) लाल मिर्च को, आधा गज लाल कपड़े में रख कर व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उसार कर इसे किसी नदी या बहते पानी में प्रवाहित कर दें।

4॰ किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं। जिस पात्र में पानी पीएं, उसे उल्टा कर के रख दें। कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे।

5॰ घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।

6॰ रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।

7॰ पूर्णिमा के दिन चांदनी में खीर बनाएं। ठंडी होने पर चन्द्रमा और अपने पितरों को भोग लगाएं। कुछ खीर काले कुत्तों को दे दें। वर्ष भर पूर्णिमा पर ऐसा करते रहने से गृह क्लेश, बीमारी तथा व्यापार हानि से मुक्ति मिलती है।

8॰ रोग मुक्ति के लिए प्रतिदिन अपने भोजन का चौथाई हिस्सा गाय को तथा चौथाई हिस्सा कुत्ते को खिलाएं।

9॰ घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं।

10॰ पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं। पीपल के पेड़ की लकड़ी सिरहाने रखें।

11॰ पत्नी बीमार हो तो गोदान करें। जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ाएँ रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखशल करने से रोग पीड़ाएँ समाप्त होती है।

12॰ मंदिर में गुप्त दान करें।

13॰ रविवार के दिन बूंदी के सवा किलो लड्डू मंदिर में प्रसाद के रूप में बांटे।

14॰ सदैव पूर्व या दक्षिण दिषा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है।

15॰ अगर परिवार में कोई परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर टोटके की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।

16॰ अमावस्या को प्रात: मेंहदी का दीपक पानी मिला कर बनाएं। तेल का चौमुंहा दीपक बना कर 7 उड़द के दाने, कुछ सिन्दूर, 2 बूंद दही डाल कर 1 नींबू की दो फांकें शिवजी या भैरों जी के चित्र का पूजन कर, जला दें। महामृत्युजंय मंत्र की एक माला या बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ कर रोगशोक दूर करने की भगवान से प्रार्थना कर, घर के दक्षिण की ओर दूर सूखे कुएं में नींबू सहित डाल दें। पीछे मुड़कर नहीं देखें। उस दिन एक ब्राह्मण ब्राह्मणी को भोजन करा कर वस्त्रादि का दान भी कर दें। कुछ दिन तक पक्षियों, पशुओं और रोगियों की सेवा तथा दानपुण्य भी करते रहें। इससे घर की बीमारी, भूत बाधा, मानसिक अशांति निश्चय ही दूर होती है।

17॰ किसी पुरानी मूर्ति के ऊपर घास उगी हो तो शनिवार को मूर्ति का पूजन करके, प्रात: उसे घर ले आएं। उसे छाया में सुखा लें। जिस कमरे में रोगी सोता हो, उसमें इस घास में कुछ धूप मिला कर किसी भगवान के चित्र के आगे अग्नि पर सांय, धूप की तरह जलाएं और मन्त्र विधि से ´´ ॐ माधवाय नम:। ॐ अनंताय नम:। ॐ अच्युताय नम:´´ मन्त्र की एक माला का जाप करें। कुछ दिन में रोगी स्वस्थ हो जायेगा। दानधर्म और दवा उपयोग अवश्य करें। इससे दवा का प्रभाव बढ़ जायेगा।

18॰ अगर बीमार व्यक्ति ज्यादा गम्भीर हो, तो जौ का 125 पाव (सवा पाव) आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिला कर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा सा तिल्ली का तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाए। भैंसा कहाँ मिलेगा, इसका पता पहले ही मालूम कर के रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है, केवल भैंसे को ही श्रेष्ठ रहती है। शनि और मंगलवार को ही यह कार्य करें।

19॰ पीपल के वृक्ष को प्रात: 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा।

20॰ किसी कब्र या दरगाह पर सूर्यास्त के पश्चात् तेल का दीपक जलाएं। अगरबत्ती जलाएं और बताशे रखें, फिर वापस मुड़ कर न देखें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा।

21॰ किसी तालाब, कूप या समुद्र में जहां मछलियाँ हों, उनको शुक्रवार से शुक्रवार तक आटे की गोलियां, शक्कर मिला कर, चुगावें। प्रतिदिन लगभग 125 ग्राम गोलियां होनी चाहिए। रोगी ठीक होता चला जायेगा।

22॰ शुक्रवार रात को मुठ्ठी भर काले साबुत चने भिगोयें। शनिवार की शाम काले कपड़े में उन्हें बांधे तथा एक कील और एक काले कोयले का टुकड़ा रखें। इस पोटली को किसी तालाब या कुएं में फेंक दें। फेंकने से पहले रोगी के ऊपर से 7 बार वार दें। ऐसा 3 शनिवार करें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा।

23॰ सवा सेर (125 सेर) गुलगुले बाजार से खरीदें। उनको रोगी पर से 7 बार वार कर चीलों को खिलाएं। अगर चीलें सारे गुलगुले, या आधे से ज्यादा खा लें तो रोगी ठीक हो जायेगा। यह कार्य शनि या मंगलवार को ही शाम को 4 और 6 के मध्य में करें। गुलगुले ले जाने वाले व्यक्ति को कोई टोके नहीं और न ही वह पीछे मुड़ कर देखे।

24॰ यदि लगे कि शरीर में कष्ट समाप्त नहीं हो रहा है, तो थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं।

25॰ प्रतिदिन या शनिवार को खेजड़ी की पूजा कर उसे सींचने से रोगी को दवा लगनी शुरू हो जाती है और उसे धीरेधीरे आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा। यदि प्रतिदिन सींचें तो 1 माह तक और केवल शनिवार को सींचें तो 7 शनिवार तक यह कार्य करें। खेजड़ी के नीचे गूगल का धूप और तेल का दीपक जलाएं।

26॰ हर मंगल और शनिवार को रोगी के ऊपर से इमरती को 7 बार वार कर कुत्तों को खिलाने से धीरेधीरे आराम मिलता है। यह कार्य कम से कम 7 सप्ताह करना चाहिये। बीच में रूकावट न हो, अन्यथा वापस शुरू करना होगा।

27॰ साबुत मसूर, काले उड़द, मूंग और ज्वार चारों बराबरबराबर ले कर साफ कर के मिला दें। कुल वजन 1 किलो हो। इसको रोगी के ऊपर से 7 बार वार कर उनको एक साथ पकाएं। जब चारों अनाज पूरी तरह पक जाएं, तब उसमें तेलगुड़ मिला कर, किसी मिट्टी के दीये में डाल कर दोपहर को, किसी चौराहे पर रख दें। उसके साथ मिट्टी का दीया तेल से भर कर जलाएं, अगरबत्ती जलाएं। फिर पानी से उसके चारों ओर घेरा बना दें। पीछे मुड़ कर न देखें। घर आकर पांव धो लें। रोगी ठीक होना शुरू हो जायेगा।

28॰ गाय के गोबर का कण्डा और जली हुई लकड़ी की राख को पानी में गूंद कर एक गोला बनाएं। इसमें एक कील तथा एक सिक्का भी खोंस दें। इसके ऊपर रोली और काजल से 7 निशान लगाएं। इस गोले को एक उपले पर रख कर रोगी के ऊपर से 3 बार उतार कर सुर्यास्त के समय मौन रह कर चौराहे पर रखें। पीछे मुड़ कर न देखें।

29॰ शनिवार के दिन दोपहर को 225 (सवा दो) किलो बाजरे का दलिया पकाएं और उसमें थोड़ा सा गुड़ मिला कर एक मिट्टी की हांडी में रखें। सूर्यास्त के समय उस हांडी को रोगी के शरीर पर बायें से दांये 7 बार फिराएं और चौराहे पर मौन रह कर रख आएं। आतेजाते समय पीछे मुड़ कर न देखें और न ही किसी से बातें करें।

30॰ धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें।

31॰ सरसों के तेल को गरम कर इसमें एक चमड़े का टुकड़ा डालें, पुन: गर्म कर इसमें नींबू, फिटकरी, कील और काली कांच की चूड़ी डाल कर मिट्टी के बर्तन में रख कर, रोगी के सिर पर फिराएं। इस बर्तन को जंगल में एकांत में गाड़ दें।

32॰ घर से बीमारी जाने का नाम न ले रही हो, किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र ले कर उसे हांडी में पिरो कर रोगी के पलंग के पाये पर बांधने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलता है। उस दिन से रोग समाप्त होना शुरू हो जाता है।

33॰ यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोगपीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बारबार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर भी शांत हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहू¡ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। गेहूँ का दान जरूरतमंद एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों को ही करना चाहिए।

34॰ यदि जन्म कुण्डली में अष्टम भाव से सम्बन्धित ग्रह की दशाअन्तर्दशा चल रही हो, तो ऐसी दशा में पूर्वजन्म कृत अशुभ कार्यों के कारण इस जन्म में रोग की पीड़ा का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उस ग्रह से सम्बन्धित अनाज को उस ग्रह के वार के दिन बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए।

35॰ जन्म कुण्डली में षष्ठ भाव से रोगों का विचार किया जाता है। अत: षष्ठ भाव का स्वामी अशुभ हो, तो अपनी दशा में रोगपीड़ा देता है। अत: निर्बल षष्ठेश की दशाअन्तर्दशा में उससे सम्बन्धित रोगों से पीड़ा मिल सकती है षष्ठेश के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए षष्ठेश ग्रह की प्रतिनिधि वस्तु को भूमि खोदकर दबाना चाहिए।

36॰ जो व्यक्ति नींद में चौंक जाते हों या भयभीत हो जाते हों, उन्हें तुलसी की जड़ को अपने हाथों के द्वारा भूमि खोदकर निकालना चाहिए, जड़ निकालने के लिए किसी धातु से बनी वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि तुलसी की ऐसी जड़ को गले में धारण किया जाए, तो उस व्यक्ति को निद्रावस्था में उत्पन्न होने वाले भय से मुक्ति मिलती है।

चर्म रोग

37॰ ऋषिमुनियों ने सभी चर्म रोगों एवं हृदय रोग में रूद्राक्ष की महत्ता को समझा उनके अनुसार पाँचमुखी, सातमुखी, ग्यारहमुखी एवं सोलहमुखी रूद्राक्ष में उत्तरोत्तर चर्म रोग नाश करने की अधिक शक्ति होती है। अत: गंगाजल में रूद्राक्ष घिस कर जो लेप बने, उसे कुछ दिनों तक नियमित लगाने से लाभ होता है। चर्म रोग अधिक कष्टदायी हो गया हो, तो शुद्ध चन्दन की अगरबत्ती, धूपबत्ती शिवजी के आगे जलाएं तथा अगरबत्ती जब तक जलती रहे, शिवजी से रोग नाश हेतु प्रार्थना करें। अगरबत्ती जल जाने के बाद उसकी भभूती को भी रूद्राक्ष के लेप में मिला लें। फिर चर्म रोग के स्थान पर लगाने से आष्चर्यजनक लाभ महसूस करेंगे। ध्यान रहे कि यह क्रिया सोमवार के दिन से प्रारम्भ करने से अधिक प्रशवशाली होगी तथा अगरबत्ती शुद्ध चन्दन की ही उपयोग करें।

38॰ जिस व्यक्ति को एलर्जी एवं चर्म रोगों से निरन्तर पीड़ा मिल रही हो, तो ऐसे व्यक्ति को बुधवार के दिन मिट्टी का घड़ा खरीद कर एक सप्ताह तक घर पर रखकर अगले बुधवार को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।

39॰ मधुमेह के लिए निम्न प्रयोग मधुमेह की जांचपड़ताल के बाद करें। श्रावण के महीने में 11 बिल्व पत्र पर केसर से `राम´ लिखें। `ॐ नम: शिवाय´ कहते हुए इन्हें शिवजी पर चढ़ाएं। फिर `ॐ नम: शिवाय´ कहते हुए इन्हें वापस उठा लें। इनको साफ कर के पानी से धो कर पीस लें व इनका रस निकाल कर पी जाएं। ऐसा एक माह तक रोजाना करें। जिस पात्र में डाल कर रस पीएं, उसे रस पीने के बाद उल्टा रख दें।

बच्चों के रोग

40॰ जब किसी का बच्चा बारबार बीमार होता रहता है तथा दवाउपचार आदि करवाने पर भी विशेष लाभ नहीं मिल पाता है, तो ऐसी स्थिति में मंगलवार के दिन किसी सुनार को अष्ट धातु का कड़ा, बच्चे के नाप के अनुसार, बनवाने के लिए दें तथा उस कड़े को शनिवार के दिन घर ले आएं। कड़े को गंगाजल से धो कर शुद्ध करें तथा उस कड़े में थोड़ा सा सिंदूर लगा दें। कड़े को अपने सामने रख कर यथाशक्ति हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करें। इसके बाद उस कड़े को बच्चे के दाहिने हाथ में पहना दें। हनुमान जी की कृपा से बच्चा शीघ्र स्वस्थ हो जाएगा।

41॰ किसी भी रविवार / मंगलवार के दिन फिटकरी का टुकड़ा बच्चे के सिरहाने रख दें। बच्चा बुरे स्वप्न के प्रभाव से दूर रह कर आराम से सो सकेगा।

42॰ बच्चा अकारण रोता रहे, तो कही से बकरी की मैंगनी ला कर बच्चे के सिरहाने रख दें। ऐसा करने से बच्चा रात भर आराम से सोएगा तथा बिना वजह उठ कर अपनी माँ को परेशान नहीं करेगा।

43॰ यदि बच्चे अधिक रोते हों, या सोते समय चमकते हों, तो शव यात्रा में पार्थिव देह पर कुछ कुछ सामग्री उबारी जाती है, जिसमें कौड़ी, सिगाड़ा, सिक्के आदि होते है। ऐसी उबारी हुई कोई भी वस्तु ले आएं तथा पीड़ित बच्चे के सिरहाने रख दें, अथवा गले में पहना दें। बच्चा चमकना तथा व्यर्थ रोना बंद हो जाएगा।

44॰ बच्चों को नजर शीघ्र लगती है। नजर लगने की दषा में बच्चा लगातार रोता रहता है। आंखों एवं होठों का सूज जाना एवं अन्य बीमारी भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में राई की धुनी बच्चे को देनी चाहिए। 7 साबुत लाल मिर्च बच्चे पर से उबार कर जला दें। 9 नींबुओं पर तेल लगाएं। फिर उन पर सिंदूर लगाएं, अब उन्हें बच्चे पर से 7 बार उबार कर, किसी चौराहे पर ले जा कर, 4 भाग कर के, चारों दिशाओं में फेंक आएं।

45॰ कई बार बच्चे खानापीना बिल्कुल बंद कर देते हैं। दूध तो छूते ही नहीं हैं। ऐसी स्थिति में निम्न प्रयोग करें : घर में जो भी खाना बना हो, बच्चे की खुराक के अनुरूप थाली में परोस लें। फिर बच्चे के मुहं पर लगा कर उसे झूठा कर लें। यदि उसे बच्चे को खिला भी दिया जाए, तो अच्छा हो। पुन: उसी थाली को वापस परोस लें (यदि बच्चे ने खाया हो तो) अब उस थाली को, `ॐ ह्रीं अन्नपूर्णे सदा पूर्णे स्वाहा´ बोलते हुए, 29 बार बच्चे पर से उबारें। उबारने के पश्चात् सारा खाना गाय को खिला दें। बच्चा खाना खाने लगेगा। ऐसा ही प्रयोग दूध पर भी किया जा सकता है। इसमें मंत्र ` ॐ सोमाय स्वाहा´ बोलें। दूध बिल्ली या कुत्ते के पिल्ले को पिलाएं। बच्चा दूध पीने लगेगा।

46॰ बच्चे के अधिक रोने या नींद न आने से किसी भी बृहस्पतिवार को एक फिटकरी का टुकड़ा सफेद रंग के कपड़े में बांध कर, सफेद धागे से बच्चे के गले में बांध दें, तो बच्चा सुखपूर्वक सोएगा।

47॰ अगर छोटा बच्चा बीमार हो, तो उसके वजन के बराबर बाजरा लें। उसमें से 7 मुठ्ठी बाजरा, रोज बालक पर से एक बार वार कर छोटीछोटी चिड़ियों को सूर्योदय से पहले डालें। आराम मिलेगा।

48॰ रूद्राक्ष की तरह `रीठा´ के 108 दानों की माला बच्चों को पहनाने से बच्चों के दाँत आसानी से एवं जल्दी निकलते हैं।

49॰ बच्चे को अपना ही मूत्र पिलाने से अफारा दूर होता है। बकरी या बकरे की मींगनी बच्चे या बड़े को पानी के साथ खिलाने से भी अफारा दूर होता है।

50॰ काले कौवे की विष्ठा को रविवार के दिन बांध कर, काले धागे में पिरोकर बच्चे के गले में पहनाने से बच्चे का सिर का काग गिरना बंद हो जाता है तथा खांसी भी ठीक हो जाती है।

नजर उतारना

51॰ झाडू को चूल्हे / गैस की आग में जला कर, चूल्हे / गैस की तरफ पीठ कर के, बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे। तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही, चूल्हे की तरफ फेंक दें। कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें। बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी।

52॰ नमक की डली, काला कोयला, डंडी वाली 7 लाल मिर्च, राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर, आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है।

53॰ फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है, नजर लगाने वाले की धुंधलीसी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है।

54॰ तेल की बत्ती जला कर, बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें। यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभकभभक कर जलेगी। नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी।

नोट :- नजर उतारते समय, सभी प्रयोगों में ऐसा बोलना आवश्यक है कि इसको बच्चे की, बूढ़े की, स्त्री की, पुरूष की, पशुपक्षी की, हिन्दू या मुसलमान की, घर वाले की या बाहर वाले की, जिसकी नजर लगी हो, वह इस बत्ती, नमक, राई, कोयले आदि सामान में आ जाए तथा नजर का सताया बच्चाबूढ़ा ठीक हो जाए। सामग्री आग या बत्ती जला दूंगी या जला दूंगा।´´

55॰ लकवा

क॰ गाय को हर बुधवार पालक खिलाएं।

ख॰ लोहे की अंगूठी में नीलम मध्यमा में तथा तांबे की अंगूठी में लहसुनिया जड़वा कर कनिष्ठिका में धारण करें पुरूष दाहिने हाथ में तथा स्त्री बायें हाथ में।

ग॰ प्रतिदिन पीपल वृक्ष को सींचे व दीपक जलायें।

56॰ थाइरॉइड से बचाव

क॰ थाइरॉइड रोग गुरू की प्रतिकूलता से होता है। इससे बचाव के लिये गुरू यंत्र की नियमित रूप से पूजा और उसके मंत्र का एक माला जप रोज करें।

ख॰ गुरूवार को चने की दाल मन्दिर में चढ़ाएं।

ग॰ पीला हकीक अष्टधातु में तथा लहसुनिया चांदी में धारण करें।

घ॰ गुरूवार व शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

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