बगलामुखी त्र्यक्षर मंत्र –
|| ॐ ह्लीं ॐ ||

बगलामुखी चतुरक्षर मन्त्र –
|| ॐ आं ह्लीं क्रों ||
(सांख्यायन तन्त्र)

विनियोगः- ॐ अस्य चतुरक्षर बगला मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, बगलामुखी देवता, ह्लीं बीजं, आं शक्तिः क्रों कीलकं, सर्वार्थ सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।

ऋष्यादि-न्यासः– ब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, बगलामुखी देवतायै नमः हृदि, ह्लीं बीजाय नमः गुह्ये, आं शक्तये नमः पादयो, क्रों कीलकाय नमः नाभौ, सर्वार्थ सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।

षडङ्ग-न्यास  कर-न्यास अंग-न्यास
ॐ ह्लां अंगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमः
ॐ ह्लीं तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहा
ॐ ह्लूं मध्यमाभ्यां नमः शिखायै वषट्
ॐ ह्लैं अनामिकाभ्यां नमः कवचाय हुं
ॐ ह्लौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः नेत्र-त्रयाय वौषट्
ॐ ह्लः करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः अस्त्राय फट्

ध्यानः- हाथ में पीले फूल, पीले अक्षत और जल लेकर ‘ध्यान’ करे –

कुटिलालक-संयुक्तां मदाघूर्णित-लोचनां,
मदिरामोद-वदनां प्रवाल-सदृशाधराम् ।
सुवर्ण-कलश-प्रख्य-कठिन-स्तन-मण्डलां,
आवर्त्त-विलसन्नाभिं सूक्ष्म-मध्यम-संयुताम् ।
रम्भोरु-पाद-पद्मां तां पीत-वस्त्र-समावृताम् ।।

पुरश्चरण में चार लाख जप कर, मधूक-पुष्प-मिश्रित जल से दशांश तर्पण कर घृत-शर्करा-युक्त पायस से दशांश हवन ।

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3 comments on “बगलामुखी मंत्र प्रयोग

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