December 14, 2025 | aspundir | Leave a comment लक्ष्मीप्रद श्रीगणपति स्तोत्रम् लक्ष्मी प्राप्ति के लिये ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने । दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥ लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् । अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ॥ ॐ ह्रीँ ह्रीं हूं हैं ह्रौं ह्रः हेरम्बाय नमो नमः । सर्वसिद्धिप्रदोऽसि त्वं सिद्धिबुद्धिप्रदो भव ॥ चिन्तितार्थप्रदस्त्वं हि सततं मोदकप्रियः । सिन्दूरारुणवस्त्रैश्च पूजितो वरदायकः ॥ इदं गणपतिस्तोत्रं यः पठेद् भक्तिमान् नरः । तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मुञ्चति ॥ सम्पूर्ण सौख्य प्रदान करने वाले सच्चिदानन्दस्वरूप विघ्नराज गणेश को नमस्कार है। जो दुष्ट अरिष्ट ग्रहों का नाश करने वाले परात्पर परमात्मा हैं, उन गणपति को नमस्कार है। जो महापराक्रमी, लम्बोदर, सर्पमय यज्ञोपवीत से सुशोभित, अर्धचन्द्रधारी और विघ्नसमूह का विनाश करने वाले हैं, उन गणपतिदेव की मैं वन्दना करता हूँ। ॐ ह्रीँ ह्रीं हूँ हैं ह्रौं ह्र: हेरम्ब को नमस्कार है । भगवन्! आप सब सिद्धियों के दाता हैं; आप हमारे लिये सिद्धि- बुद्धिदायक हों। आपको सदा ही मोदक (लड्डू) प्रिय है। आप मन के द्वारा चिन्तित अर्थ को देने वाले हैं। सिन्दूर और लाल वस्त्र से पूजित होकर आप सदा वर प्रदान करते हैं। जो मनुष्य भक्तिभाव से युक्त हो इस गणपति- स्तोत्र का पाठ करता है, स्वयं लक्ष्मी उसके देह-गेह को नहीं छोड़तीं। Please follow and like us: Related Discover more from Vadicjagat Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe