सब प्रकार के कष्टों के निवारण का अचूक उपाय
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मन्त्र जप का अनुभव

इस मन्त्र के जप की विधि यह है कि प्रात:काल स्नान आदि से शुद्ध होकर पवित्र स्थान में या ऊनके आसन पर पूर्व या उत्तराभिमुख बैठ जाय और भगवान् श्रीगणेश की प्रतिमा या मॅढ़वाये हुए चित्रपट को अपने सम्मुख विराजमान कर ले। चन्दन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से श्रीगणेश का पूजन कर प्रथम दिन संकल्प करे कि ‘अमुक कार्य की सिद्धि के लिये इस मन्त्र का प्रतिदिन इतना जप किया जायगा’।

तत्पश्चात् भगवान् गणेश का स्मरण करते हुए एकाग्रचित्त से जप किया जाय। जप के समय आदि से अन्त तक शुद्ध घी का दीपक श्रीगणेश-विग्रह की दाहिनी ओर प्रज्वलित रहे । दीपक के नीचे अक्षत आदि रख दिये जायँ । प्रतिदिन १०८ माला का जप हो तो सर्वोत्तम है, नहीं तो सुविधानुसार ५५, ३१, ११ माला का भी जप किया जा सकता है। कार्यसिद्धि तक यह जप चलता रहे। जप व्यक्ति स्वयं भी कर सकता है अथवा सदाचारी सात्त्विक विद्वान् ब्राह्मण द्वारा यथोचित दक्षिणा देकर भी करवा सकता है।

जो यज्ञोपवीतधारी न हों, उन्हें ‘ॐ’ कार को छोड़कर केवल ‘गं गणपतये नमः’ मन्त्र का जप करना चाहिये । बिना किसी कामना के भगवान् गणेश की प्रसन्नता के लिये ही इस मन्त्र की प्रतिदिन ५, ११, २१ मालाएँ जप करने से जपकर्ता का सर्वविध मंगल होता है। यह परम मंगलकारक मन्त्र है; इसका आश्रय ग्रहण करने वालों को भगवान् श्रीगणेश की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

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