शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 11 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् शिव का तपस्या के लिये हिमालय पर आगमन, वहाँ पर्वतराज हिमालय से वार्तालाप ब्रह्माजी बोले — हिमालय की वह लोकपूजित पुत्री पार्वती उनके घर में बढ़ती हुई जब आठ वर्ष की हो गयी, तब हे नारद ! उसका… Read More
हेरम्बोपनिषत् ॥ हेरम्बोपनिषत् ॥ ॐ सहनाववतु । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अथातो हेरम्बोपनिषदं व्याख्यास्यामः । गौरी सा सर्वमङ्गला सर्वज्ञं परिसमेत्योवाच । अधीहि भगवन्नात्मविद्यां प्रशस्तां यया जन्तुर्मुच्यते मायया च । यतो दुःखाद्विमुक्तो याति लोकं परं शुभ्रं केवलं सात्विकं च ॥ १॥… Read More
गौरिकृतम् हेरम्बस्तोत्रं ॥ गौरिकृतम् हेरम्बस्तोत्रं ॥ ॥ गौर्युवाच ॥ गजानन ज्ञानविहारकारिन्न मां च जानासि परावमर्षाम् । गणेश रक्षस्व न चेच्छरीरं त्यजामि सद्यस्त्वयि भक्तियुक्ता ॥ १ ॥ विघ्नेश हेरम्ब महोदर प्रिय लम्बोदर प्रेमविवर्धनाच्युत । विघ्नस्य हर्ताऽसुरसङ्घहर्ता मां रक्ष दैत्यात्वयि भक्तियुक्ताम् ॥ २ ॥… Read More
महागणपति मंत्रः ॥ महागणपति मंत्रः ॥ मंत्र – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा । यह मन्त्र संसार का वशीकरण कर सर्वसिद्धि देने वाला है । विनियोगः- ॐ अस्य श्री महागणपति मंत्रस्य गणक ऋषिः (शिरसि), निवृद गायत्री छन्दः (मुखे), महागणपतये देवताये (हृदि), सर्वाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।… Read More
गणेश शाबर मंत्र गणेशजी शाबर मंत्र प्रयोग १ – निम्न मंत्र का पाठ प्रति दिन तीन बार करने से विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है । मंत्रः— जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश पाहि माम । जय गणेश जय गणेश, जय गणेश रक्ष माम । जय सरस्वती, जय सरस्वती जय सरस्वती पाहि माम । जय अम्बे, जय अम्बे,… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 10 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय शिवजी के ललाट से भौमोत्पत्ति नारदजी बोले — हे विष्णुशिष्य ! हे महाभाग ! हे विधे ! हे शिवभक्तों में श्रेष्ठ ! हे प्रभो ! आप शिवजी की इस लीला को प्रीतिपूर्वक विस्तार से मुझसे कहिये ॥ १ ॥… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 09 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 09 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः नौवाँ अध्याय पार्वती के विवाह के सम्बन्ध में मेना और हिमालय का वार्तालाप, पार्वती और हिमालय द्वारा देखे गये अपने स्वप्न का वर्णन नारदजी बोले — हे विधे ! हे तात ! हे शिवभक्तों में श्रेष्ठ ! हे प्राज्ञ ! आपने… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 08 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय नारद मुनि का हिमालय के समीप गमन, वहाँ पार्वती का हाथ देखकर भावी लक्षणों को बताना, चिन्तित हिमवान् को शिवमहिमा बताना तथा शिव से विवाह करने का परामर्श देना ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! एक समय की बात… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 07 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय पार्वती का नामकरण तथा उनकी बाललीलाएँ एवं विद्याध्ययन ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] तदनन्तर मेना के सामने महातेजस्वी कन्या होकर वे लौकिक गति का आश्रय लेकर रोने लगीं । हे मुने ! उस समय प्रसूति गृह की शय्या के… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 06 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय देवी उमा का हिमवान् के हृदय तथा मेना के गर्भ में आना, गर्भस्था देवी का देवताओं द्वारा स्तवन, देवी का दिव्यरूप में प्रादुर्भाव, माता मेना से वार्तालाप तथा पुनः नवजात कन्या के रूप में परिवर्तित होना ब्रह्माजी बोले —… Read More