विरिगणपति ॥ विरिगणपति ॥ इस देवता की वीरभाव से उपासना करे, पात्रासादन तथा शक्त्यार्चन कर पूजा करें तो अधिक लाभ रहे । इस मंत्र के गणक ऋषि, गायत्री छन्द तथा विरिंगणपति देवता है । मंत्र :- ॐ ह्रीं विरि विरिगणपति वर वरद सर्वलोकं मे वशमानय स्वाहा ।… Read More
दशाक्षर क्षिप्रप्रसादगणपति (विघ्नराज) मंत्र ॥ अथ दशाक्षर क्षिप्रप्रसादगणपति (विघ्नराज) मंत्र ॥ मन्त्र – गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः । क्षिप्र प्रसाद गणपति का पूजन श्रीविद्या ललिता सुन्दरी उपासना में मुख्य है । इनके बिना श्री विद्या अधूरी है। जो साधक श्री साधना करते हैं उन्हें सर्वप्रथम इनकी साधना कर इन्हें प्रसन्न करना चाहिए। कामदेव की भस्म से उत्पन्न दैत्य से श्री… Read More
उच्छिष्ट गणपति प्रयोगः ॥ अथ उच्छिष्ट गणपति प्रयोगः ॥ उच्छिष्ट गणपति का प्रयोग अत्यंत सरल है तथा इसकी साधना में अशुचि-शुचि आदि बंधन नहीं हैं तथा मंत्र शीघ्रफल प्रद है । यह अक्षय भण्डार का देवता है । प्राचीन समय में यति जाति के साधक उच्छिष्ट गणपति या उच्छिष्ट चाण्डालिनी (मातङ्गी) की साधना व सिद्धि द्वारा थोड़े से… Read More
भगवान् श्रीगणेश के विभिन्न मन्त्र ॥ भगवान् श्रीगणेश के विभिन्न मन्त्र ॥ 1. एकाक्षर मन्त्र – १॰ “गं” २॰ “गः” ३॰ “गौं”… Read More
एकाक्षर गणपति कवचम् अथवा त्रैलोक्यमोहन कवचम् ॥ एकाक्षर गणपति कवचम् अथवा त्रैलोक्यमोहन कवचम् ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ नमस्तस्मै गणेशाय सर्वविघ्नविनाशिने । कार्यारम्भेषु सर्वेषु पूजितो यः सुरैरपि ॥ १॥ ॥ पार्वत्युवाच॥ भगवन् देवदेवेश लोकानुग्रहकारकः । इदानी श्रोतृमिच्छामि कवचं यत्प्रकाशितम् ॥ २॥ एकाक्षरस्य मन्त्रस्य त्वया प्रीतेन चेतसा । वदैतद्विधिवद्देव यदि ते वल्लभास्म्यहम् ॥ ३॥… Read More
शत्रुसंहारकमेकदन्तस्तोत्रम् ॥ शत्रुसंहारकमेकदन्तस्तोत्रम् ॥ ॥ सनत्कुमार उवाच ॥ शृणु शम्भ्वादयो देवा मदासुरविनाशने । उपायं कथयिष्यामि तत्कुरुध्वं मुनीश्वराः ॥ १ ॥ गणेशं पूजयध्वं वै यूयं सर्वे समावृताः । स बाह्यान्तरसंस्थो वै हनिष्यति मदासुरम् ॥ २ ॥ सनत्कुमारवाक्यं तच्छ्रुत्वा देवर्षिसत्तमाः । ऊचुस्तं प्रणिपत्यादौ भक्तिनम्रात्मकन्धराः ॥ ३ ॥… Read More
विघ्न-निवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् ॥ विघ्न-निवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् ॥ विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद । दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन् विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥ १ ॥… Read More
उच्छिष्ट गणेश स्तवराजः ॥ उच्छिष्ट गणेशस्तवराजः ॥ ॥ देव्युवाच ॥ पूजान्ते ह्यनया स्तुत्या स्तुवीत गणनायकम् । नमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम् । गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभवासनं च ॥ १ ॥… Read More
श्रीउच्छिष्ट गणपति सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ श्रीउच्छिष्ट गणपति सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीभैरव उवाच ॥ शृणु देवि रहस्यं मे यत्पुरा सूचितं मया । तव भक्त्या गणेशस्य वक्ष्ये नामसहस्रकम् ॥ १॥ ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ ॐ भगवन्गणनाथस्य उच्छिष्टस्य महात्मनः । श्रोतुं नाम सहस्रं मे हृदयं प्रोत्सुकायते ॥ २॥… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 05 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय मेना की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी का उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देकर वरदान देना, मेना से मैनाक का जन्म नारदजी बोले — हे तात ! जब देवी दुर्गा अन्तर्धान हो गयीं और देवगण अपने-अपने धाम को चले गये, उसके… Read More