शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 03 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय मायानिर्मित नगर में शीलनिधि की कन्या पर मोहित हुए नारदजी का भगवान् विष्णु से उनका रूप माँगना, भगवान् का अपने रूप के साथ वानरका-सा मुँह देना, कन्या का भगवान् को वरण करना और कुपित हुए नारद का शिवगणों… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 02 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय नारद मुनि की तपस्या, इन्द्र द्वारा तपस्या में विघ्न उपस्थित करना, नारद का काम पर विजय पाना और अहंकार से युक्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र से अपने तप का कथन सूतजी बोले — [हे मुनियो!] एक समय की… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 01 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय ऋषियों के प्रश्न के उत्तर में श्रीसूतजी द्वारा नारद-ब्रह्म-संवाद की अवतारणा विश्वोद्भवस्थितिलयादिषु हेतुमेकं गौरीपतिं विदिततत्त्वमनन्तकीर्तिम् । मायाश्रयं विगतमायमचिन्त्यरूपं बोधस्वरूपममलं हि शिवं नमामि ॥ जो विश्व की उत्पत्ति-स्थिति और लय आदि के एकमात्र कारण हैं, गिरिराजकुमारी उमा के पति… Read More
श्री रुद्र कवचम् ॥ श्री रुद्र कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ विनियोग- ॐ अस्य श्री रुद्र कवच स्तोत्र महा मंत्रस्य दूर्वासऋषिः अनुष्ठुप् छंदः त्र्यंबक रुद्रो देवता ह्रां बीजं श्रीं शक्तिः ह्रीं कीलकम् – मम मनसोभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ह्रामित्यादिषड्बीजैः षडंगन्यासः ॥ ॥ ध्यानम् ॥… Read More
ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ॥ नारद उवाच ॥ शिवस्य कवचं ब्रूहि मत्स्य राजेन यद्धृतम् । नारायण महाभाग श्रोतुं कौतूहलं मम ॥ १ ॥ ॥ श्रीनारायण उवाच ॥… Read More
सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरव उवाच ॥ शैलजे देवदेवेशि सर्वाम्नायप्रपूजिते । सर्वं मे कथितं देवि कवचं न प्रकाशितम् ॥ १ ॥ प्रासाद्याख्यस्य मन्त्रस्य कवचं मे प्रकाशय । सदाशिवमहादेवभावितं सिद्धिदायकम् ॥ २ ॥ अप्रकाश्यं महामन्त्रं भैरवीभैरवोदयम् । सर्वरक्षाकरं देवि यदि स्नेहोऽस्ति मां प्रति ॥ ३ ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरवी उवाच ॥… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 25 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 25 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पच्चीसवाँ अध्याय रुद्राक्षधारण की महिमा तथा उसके विविध भेदों का वर्णन सूतजी बोले — हे महाप्राज्ञ ! हे महामते ! शिवरूप हे शौनक ऋषे ! अब मैं संक्षेप से रुद्राक्ष का माहात्म्य बता रहा हूँ, सुनिये ॥ १ ॥ रुद्राक्ष शिव को… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 24 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 24 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौबीसवाँ अध्याय भस्म-माहात्म्य का निरूपण सूतजी बोले — हे महर्षियो ! भस्म सम्पूर्ण मंगलों को देनेवाला तथा उत्तम है, उसके दो भेद बताये गये हैं । मैं उन भेदों का वर्णन करता हूँ, आप लोग सावधान होकर सुनिये ॥ १ ॥ एकको… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 23 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय भस्म, रुद्राक्ष और शिवनाम के माहात्म्य का वर्णन ऋषिगण बोले — हे महाभाग व्यासशिष्य सूतजी ! आपको नमस्कार है । अब आप परम उत्तम भस्म-माहात्म्य का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ भस्म-माहात्म्य, रुद्राक्ष-माहात्म्य तथा उत्तम नाम-माहात्म्य — इन तीनों… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 22 शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय शिव-नैवेद्य-भक्षण का निर्णय एवं बिल्वपत्र का माहात्म्य ऋषिगण बोले — हे महामुने ! हमने पहले सुना है कि भगवान् शिव को अर्पित किया गया नैवेद्य अग्राह्य होता है, अतएव नैवेद्य के विषय में निर्णय और बिल्वपत्र का माहात्म्य भी कहिये… Read More