॥ महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य (५२ अक्षरात्मक) ॥ मन्त्र महोदधि में कहा गया है : पाप एवं विपत्ति को दूर करनेवाले महामृत्युञ्जय मन्त्र को बतलाता हूं जिसे भगवान शङ्कर से प्राप्त करके शुक्राचार्य ने मरे हुये दैत्यों को जीवित किया था। मन्त्र इस प्रकार है- मन्त्र – “ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं… Read More


॥ महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य विधानम् ॥ विनियोग :- ॐ अस्य श्री मृतसंजीवनी महामृत्युञ्जय मन्त्रस्य वामदेव, कहोल वसिष्ठऋषिः पंक्ति, गायत्री अनुष्टप् छन्दः श्रीमहामृत्युञ्जयरुद्रो देवताः, हौं बीजं, जूं शक्ति, सः कीलकं श्रीमृत्युञ्जय देवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः :- वामदेव कहोल वसिष्ठ ऋषये नमः शिरसि । पंक्ति गायत्री अनुष्टप्छन्दसे नमः मुखे । श्रीमहामृत्युञ्जय रुद्रदेवतायै नमः हृदये… Read More


॥ अथ शताक्षरी मृत्युञ्जय प्रयोगः ॥ विनियोगः – ॐ अस्य श्री शताक्षरी गायत्रीमन्त्रस्य विश्वामित्र मरीचि कश्यप वसिष्ठ ऋषयो गायत्री त्रिष्टप् अनुष्टप्छन्दासि सवितृ जातवेदस्त्र्यम्बका देवता गायत्र्यक्षराणि बीजानि अनुष्टबक्षराणि शक्तयस्त्रिष्टुबक्षराणि कीलकानि ममारिष्टशान्तये जपे विनियोगः ।… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय सृष्टि का वर्णन नारदजी बोले — हे महाभाग ! हे विधे ! हे देवश्रेष्ठ ! आप धन्य हैं । आपने आज यह शिव की परमपावनी अद्भुत कथा सुनायी ॥ १ ॥ इसमें सदाशिव की लिंगोत्पत्ति की जो कथा हमने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय विभिन्न पुष्पों, अन्नों तथा जलादि की धाराओं से शिवजी की पूजा का माहात्म्य ऋषिगण बोले — हे महाभाग ! हे व्यासशिष्य ! आप सप्रमाण हमें यह बतायें कि किन-किन पुष्पों से पूजन करने पर भगवान् सदाशिव कौन-कौन-सा फल प्रदान… Read More


॥ त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ शारदातिलक मन्त्र:- “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥” ऋचा के पहले ॐ लगायें । आगे व पीछे दोनों ओर ॐ लगाने से ३४ अक्षर का मन्त्र हुआ । विनियोगः – ॐ अस्य त्र्यम्बक मन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टप् छन्दः त्र्यम्बकपार्वतीपतिर्देवता, त्र्यं बीजं, बं शक्तिः, कं कीलकं… Read More


॥ मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जयस्त्रिधा प्रोक्त आद्यो मृत्युञ्जयः स्मृतः । मृतसञ्जीवनी चैव महामृत्युञ्जयस्तथा ॥ मृत्युञ्जयः केवलः स्यात् पुटितो व्याहृतित्रयैः । तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितो मृतसञ्जीवनी ॥ तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितैस्तैस्त्र्यम्बकः । महामृत्युञ्जयः प्रोक्तः सर्वमन्त्रविशारदैः ॥ उक्त उद्धार मन्त्रों के अनुसार ‘त्र्यम्बक यजामहे..’ ऋचा को आद्य व अन्त में व्याहृति ‘भूर्भुवः स्वः’ से संपुटित… Read More


॥ मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ Continue :- मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद नवाक्षरी मृत्युञ्जय – ॐ जूं सः पालय पालय । दशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्र – ॐ जूं सः मां पालय पालय । (किसी अन्य के लिये ‘मां’ के स्थान पर रोगी का नाम द्वितीया विभक्ति का एक वचन बनाकर जोड़ देना चाहिये) द्वादशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्रः –… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय शिवपूजन की सर्वोत्तम विधि का वर्णन ब्रह्माजी बोले — अब मैं पूजा की सर्वोत्तम विधि बता रहा हूँ, जो समस्त अभीष्ट सुखों को सुलभ करानेवाली है । हे देवताओ तथा ऋषियो ! आपलोग ध्यान देकर सुनें ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय भगवान् शिव की श्रेष्ठता तथा उनके पूजन की अनिवार्य आवश्यकता का प्रतिपादन नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे प्रजापते ! हे तात ! आप धन्य हैं; क्योंकि आपकी बुद्धि भगवान् शिव में लगी हुई है । हे विधे… Read More