त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ त्रिपुरसुन्दर्यादूती वशिनीकृत राधा स्तुतिः ॥ राधा ने त्रिपुर सुन्दरी की उपासना की कि हे मां मेरी सहायता करो तथा त्रिपुरसुन्दरी ने अपनी वशिन्यादि दूतियों को सहायता करने को कहा तब वशिन्यादि ने राधा की प्रशंसा व स्तुति की । यथा — जय जय राधे कृतनतराधे जगदभिवन्द्ये सुरवरवन्द्ये । धृतबहुरूपे स्मरमखरूपे सरसिजवक्त्रे सुमदिरनेत्रे ॥ जय… Read More
श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ अथ श्रीराधा कृपाकटाक्ष स्तोत्र ॥ मुनीन्द्र-वृन्द-वन्दिते त्रिलोक-शोकहारिणि, प्रसन्न-वक्त्र-पङ्कजे निकुञ्ज-भूविलासिनि । व्रजेन्द्र-भानुनन्दनि व्रजेन्द्र सूनुसङ्गते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ १ ॥ अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते, प्रवाल-बाल)-पल्लव-प्रभारुणाङ्घ्रिकोमले । वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम् ॥ २ ॥… Read More
श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ अथ श्रीराधिका त्रैलोक्यमङ्गल कवचम् ॥ इस कवच स्तोत्र में राधा को दशमहाविद्या प्रधान त्रिपुरसुन्दरी की दूती बताया गया है, अत: महाविद्या यह महाविद्या नहीं होकर तन्त्रानुसार उपमहाविद्या है । ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ देवदेव महादेव सृष्टिस्थित्यन्तकारक । राधिकाकवचं देव कथयस्व दयानिधे ॥ १ ॥ ॥ ईश्वरोवाच ॥… Read More
सर्वरक्षाकर श्रीराधाकवचम् ॥ सर्वरक्षाकर श्रीराधाकवचम् ॥ इस कवच को हल्दी, गोरोचन, केसर, हरिचन्दन से भोजपत्र पर लिखकर (श्लोक ९ – २१) धारण करने से अभीष्ट सिद्धि होती है । ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ कैलासवासिन् भगवन् भक्तानुग्रह-कारक । राधिका-कवचं पुण्यं कथयस्व मम प्रभो ॥ १ ॥ यद्यस्ति करुणा-नाथ त्राहि मां दुःखतो भयात् । त्वमेव शरणं नाथ शूल-पाणे पिनाक-धृक् ॥… Read More
श्रीराधा भक्तिज्ञान कवचम् ॥ अथ श्रीराधा भक्तिज्ञान कवचम् ॥ कवच की महिमा तथा राधा अष्टाक्षर व नवाक्षर मंत्र का फल बताते हुए कहा कि ब्रह्मा, धर्मराज, नरनारायण, कामदेव, अग्नि, वायु, शेष कूर्मादि ने अपना अपना यथेष्ट सिद्ध किया । महर्षि दधीचि ने कवच तथा राधा मन्त्र — “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं रां राधिकायै स्वाहा ।” के प्रभाव… Read More
श्रीराधाकवचस्तोत्रम् ब्रह्मयामले ॥ श्रीराधाकवचस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ ॐ देवदेव महादेव परमप्रीतिदायक । राधायाः कवचं देव कथय प्राणवल्लभ ॥ १ ॥ ॥ श्रीमहादेवौवाच ॥ साधु साधु महादेवि भद्रं भद्रं सुमङ्गलम् । प्रेमभावान्वितायाश्च राधायाः कवचं परम् ॥ २ ॥ श्यामप्रेमविलासन्या गोपिन्या प्रेमसागरे । मग्नायाः कवचं देवि कथयामि शृणुष्व तत् ॥ ३ ॥ ऋषिर्नारायणः प्रोक्तो गायत्री छन्द इत्यपि ।… Read More
राधाकृष्ण उपासनायां विविध न्यासाः ॥ राधाकृष्ण उपासनायां विविध न्यासाः ॥ राधाकृष्ण की उपासना में दुर्गा व दशमहाविद्याओं की तरह प्रणव, मातृका,नक्षत्रादि न्यास करने चाहिये । केशव एवं श्रीकण्ठादि न्यास तथा निम्न न्यास दैनिक पूजन समय अपने शरीर में करे अथवा पर्वादि के दिन करे । मूर्ति प्रतिष्ठा में भी ये न्यास देवमूर्ति में करने चाहिये । ॥ प्रणव न्यास… Read More
सरस्वतीस्तोत्रं अथवा वाणीस्तवनं याज्ञवल्क्योक्त ॥ सरस्वतीस्तोत्रं अथवा वाणीस्तवनं याज्ञ्यवल्क्योक्त ॥ ॥ नारायण उवाच ॥ वाग्देवतायाः स्तवनं श्रूयतां सर्वकामदम् । महामुनिर्याज्ञवल्क्यो येन तुष्टाव तां पुरा ॥ १ ॥ गुरुशापाच्च स मुनिर्हतविद्यो बभूव ह । तदाऽऽजगाम दुःखार्तो रविस्थानं च पुण्यदम् ॥ २ ॥ सम्प्राप्य तपसा सूर्यं कोणार्के दृष्टिगोचरे । तुष्टाव सूर्य्यं शोकेन रुरोद स पुनः पुनः ॥ ३ ॥ सूर्य्यस्तं पाठयामास… Read More
ब्रह्मर्षि श्रीश्री सत्यदेव — एक विलक्षण विभूति ब्रह्मर्षि श्रीश्री सत्यदेव — एक विलक्षण विभूति इस धरती पर समय-समय पर अनेक ऐसी विभूतियाँ प्रकट हुई हैं, जिन्होंने मानवमात्र के कल्याण एवं अभ्युदयहेतु ही मनुष्य-शरीर धारण किया । ऐसी ही एक उच्चकोटि की आध्यात्मिक विभूति थे, ब्रह्मर्षि श्रीश्री सत्यदेव । बंगाल के बारीशाल (इस समय बांग्लादेश में) नामक स्थान में शाक्त परम्परा के एक… Read More
वृन्दावन-महिमा ॥ वृन्दावन-महिमा ॥ वृन्दाटवी सहजवीतसमस्तदोषा दोषाकरानपि गुणाकरतां नयन्ती । पोषाय मे सकलधर्मबहिष्कृतस्य शोषाय दुस्तरमहाघचयस्य भूयात् ॥ वृन्दाटवी बहुभवीयसुपुण्यपुञ्जान्नेत्रातिथीभवति यस्य महामहिम्नः । तस्येश्वरः सकलकर्म मृषा करोति ब्रह्मादयस्तमतिभक्तियुता नमन्ति ॥… Read More