भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६६ हलपंक्तिदान-विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं सर्वपापनाशक तथा सर्वसौख्यप्रद हलपंक्ति-दान की विधि बतला रहा हूँ, जिससे सभी प्रकार के दानों का फल प्राप्त हो जाता है । एक हल के लिये चार… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६५ सुवर्णरचित भूदानकी विधि महाराज युधिष्ठिरने पूछा — भगवन् ! भूमि का दान तो क्षत्रिय ही कर सकते हैं, क्योंकि क्षत्रिय ही भूमि का उपार्जन करने में, उसका दान करने में और उसके पालन करने में समर्थ… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६४ भूमिदान की महिमा भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं सभी पापों को दूर करनेवाले भूमिदान की विधि बता रहा हूँ । जो अग्निहोत्री, दरिद्र-कुटुम्ब तथा वैदिक ब्राह्मण को दक्षिणासहित भूमि का दान करता… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६२ से १६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६२ से १६३ महिषी एवं मेघी-दानकी विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! अब मैं पापनाशक, पुण्यप्रद तथा आयु और सुखप्रदायक महिषी के दान की विधि बता रहा हूँ । सूर्य-चन्द्रग्रहण, कार्तिक पूर्णिमा, अयनसंक्रान्ति,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६१ कपिलादान की महिमा महाराज युधिष्ठिर ने कहा — जगत्पते ! अब आप कपिला-दान का माहात्म्य बतलाने की कृपा करें, जो समस्त पापों का नाश करनेवाला एवं दानों में परम पुण्यप्रद है । भगवान् श्रीकृष्ण बोले —… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १६० वृषभदान की महिमा महाराज युधिष्ठिर ने कहा — जनार्दन ! आपकी अमृतमयी वाणी से मुझे तृप्ति नहीं हो रही है, मेरे हृदय में एक कौतूहल है । तीनों लोकों में यह प्रसिद्धि है कि गौओं का… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५९ गोसहस्रदान-विधि महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — जनार्दन ! आप गोसहस्रदान का विधान बतायें । यह किस समय किस विधि से किया जाता है । भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — प्रजेश्वर ! गौएँ सम्पूर्ण संसार में पवित्र… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५८ उभयमुखी धेनु-दान का माहात्म्य महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — प्रभो ! उभयमुखी अर्थात् प्रसव के समय में गौ का दान किस प्रकार करना चाहिये और उसके दान का क्या फल है । इसे आप बतायें ।… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५७ रत्नधेनुदान-विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! अब मैं गोलोक प्राप्त कराने वाले अत्युत्तम रत्न-धेनु-दान की विधि बता रहा हूँ । किसी पुण्य दिन में भूमि को पवित्र गोबर से लीपकर उसमें धेनु की कल्पना… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५६ सुवर्ण-धेनु-दान-विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं सुवर्ण धेनु दान की विधि बता रहा हूँ, जिससे सम्पूर्ण पापों से मुक्ति मिल जाती है । पचास पल (प्रायः तीन किलो), पचीस पल अथवा जितनी… Read More