भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८६ सुवर्णनिर्मित अश्वदान-विधि का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें इस समय सुवर्ण निर्मित अश्व की प्रतिमाका दान विधान बता रहा हूँ । नरोत्तम ! किसी पुण्य दिवस में किसी गुणी सत्पात्र को यथाशक्ति तीन पल से… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८५ आत्मप्रतिकृति दान विधि का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें आत्मप्रतिकृति (अपनी प्रतिमा) का दान जो मान बढ़ाने वाला है, पहले किसी को बता भी चुका हूँ, इस समय बता रहा हूँ । पार्थ ! मुनियों… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८४ शय्यादान का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — पाण्डुकुलोद्भव ! मैं तुम्हें शय्या दान का विधान बता रहा हूँ, जिसके प्रदान से प्राणी लोक परलोक मैं सुखी होता है इसलिए श्रेष्ठ व्राह्मणगण सदैव शय्या दान सम्पन्न करते रहते… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८३ महाभूतघटदान का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें महाभूत घट दान नामक एक अन्य उत्तम दान बता रहा हूँ, जो महान पातकों का विनाश करता है । किसी पुण्य तिथि में अपने लिये अपने गृहाङ्गण में… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८२ सप्तसागरदान विधि का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — पार्थ ! मैं तुम्हें सप्तसागर का दान बता रहा हूँ, जो परमोत्तम और समस्त पापों को विनष्ट करने वाला है । युगादि तिथि या ग्रहण आदि के किसी शुभ… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८१ कालपुरुषदान का वर्णन युधिष्ठिर बोले — यदूत्तम ! कृष्ण ! मुझे दान बताने की कृपा करें, जो अत्यन्त मांगलिक, पवित्र एवं समस्त पापों का विनाशक हो । माधव ! इस संसार सागर के तारने में एक… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८० हाथी और घोड़े के रथदान विधि का वर्णन महाराज युधिष्ठिर बोले — भगवन् ! कृष्ण ! उन शूरवीर क्षत्रियों और धर्म भीरु अन्य पुरुषों को ग्रह पीडा से पीडित अथवा दुःस्वप्न दर्शन होने पर किस पवित्र… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १७८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १७८ सुवर्णनिर्मित कल्पवृक्ष दान का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — पूर्वकाल में भगवान् शङ्कर ने उमा देवी के साथ पाणिग्रहण करके अनेक वर्षों तक रमण किया । अनन्तर समस्त देवगण उन दोनों से उत्पन्न होने वाली सन्तान के… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १७९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १७९ कल्पलता-दान का वर्णन युधिष्ठिर बोले — भगवन् ! आप समस्त प्राणियों के स्वामी हैं समस्त लोक आपको नमस्कार करता है अतः लोक हितार्थ कोई अन्य बात बताने की कृपा करें । देवेश ! जिस दान, व्रत… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १७७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १७७ सुवर्ण निर्मित ब्रह्माण्डदान का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — नृपशार्दूल ! प्राचीन काल में अगस्त्य जी ने दोनों का परमोत्तम विधान बताया है, मैं तुम्हें वही बता रहा हूँ, सुनो ! राजन् ! जिस विधान द्वारा दान… Read More