भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९६ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९६ लवणपर्वतदानविधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें इस समय लवणाचल का विधान बता रहा हूँ, जिराके प्रदान करने से मनुष्य शिवलोक की प्राप्ति करता है । इस पर्वत के निर्माण में दस द्रोण का उत्तम, उसके अर्धभाग… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९५ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९५ दशविध धान्यपर्वतदान विधि का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! मैं दान का उत्तम माहात्म्य सुनना चाहता हूँ, जो देवर्षिगण पूजित एवं परलोक में अक्षय फल प्रदान करता है । श्रीकृष्ण बोले — राजन् !… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९४ वराहदान विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — युधिष्ठिर ! मैं तुम्हें आदिवराह दान का विधान बता रहा हूँ, जिसे मैंने पहले समय वराहावतार धारण कर पृथ्वी को बताया था । यह दान पुण्य, पवित्र, आयु की वृद्धि करने… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९३ तिथिदान (तिथियों में दान के पदार्थ) वर्णन श्रीकृष्ण बोले — युधिष्ठिर ! इस समय मैं तुम्हें तिथि दान का विधान बता रहा हूँ, जो समस्त पापों के शमन पूर्वक सम्पूर्ण विघ्नों का विनाश करता है ।… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९२ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९२ नक्षत्र दान-विधि का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — माधव ! आप की कृपा से मैंने समस्त दानों का विधान जान लिया है अतः इस समय मुझे नक्षत्र-दान का सविधान दान कल्प बतायें । श्रीकृष्ण बोले —… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९१ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९१ भुवनप्रतिष्ठा का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — मधुसूदन ! किस दान द्वारा शाश्वती (नियमित) प्रतिष्ठा, लोक-परलोक में अद्भुतकीर्ति, पितृ-पितामह आदि की सद्गति, लोक में अक्षय सन्तान, अत्यन्त धन की प्राप्ति होती है । महाभाग, यदुनन्दन !… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९० विश्वचक्रदान-विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें विश्वचक्र नामक अत्यन्त अद्भुत दान बता रहा हूँ, जो प्रख्यात और समस्त पापों का नाश करता है । अग्नि संतृप्त एवं अत्यन्त विशुद्ध सुवर्ण का वह चक्र बनाना चाहिए ।… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८९ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८९ सुवर्णनिर्मितहाथी के रथ-दान का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! मैं तुम्हें सुवर्ण निर्मित गजरथ का दान बता रहा हूँ, जिसके प्रदान करने से मनुष्य को विष्णु लोक प्राप्त होता है । किसी पर्व, संक्रान्ति, या… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८८ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८८ कृष्णमृगचर्म (मृगछाला या कृष्णाजिन) दान -विधि-वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — अनघ ! कृष्ण मृग चर्म का प्रदान काल और विधान तथा ब्राह्मण भी मुझे बताने की कृपा करें, क्योंकि इसमें मुझे महान् संशय उत्पन्न हो रहा… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८७ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १८७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १८७ हिरण्याश्वरथदान विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — पाण्डुकुलोद्भव ! मैं तुम्हें उस पुण्य हेम का विधान बता रहा हूँ, जो महान् पातकों का नाश करता है । ब्राह्मण की अनुज्ञा द्वारा किसी पुण्य दिन गोबर से लिपे-पुते गृहाङ्गण… Read More