भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५५ लवण धेनु दान-विधि राजा युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! आप इस प्रकार दान की विधि का वर्णन करें, जिसे करने से सभी दानों का फल प्राप्त हो जाय एवं सभी पापों का नाश हो जाय… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५४ घृत-धेनु-दान-विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं घृतधेनु दान और घृतधेनु-निर्माण की विधि बता रहा हूँ, इसे आप प्रेमपूर्वक सुनें । गाय के घी से भरे हुए कलशों को गाय की आकृति में… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५३ जलधेनु-दान के प्रसंग में महर्षि मुद्गल का आख्यान भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं जलधेनु-दान की विधि बता रहा हूँ, जिससे देवाधिदेव भगवान् विष्णु प्रसन्न होते हैं । उत्तम जल से पूर्ण एक… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५२ तिलधेनु-दान की विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! अब मैं भगवान् वाराह के द्वारा कहे गये तिलधेनु-दान की विधि बता रहा हूँ । जिससे दाता ब्रह्महत्यादि महापातकों तथा सभी उपपातकों से मुक्त हो जाता… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १५१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १५१ दान की महिमा और प्रत्यक्ष धेनु-दान की विधि महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! आपके श्रीमुख से मैंने पुराणों के विषयों को सुना । व्रतों को भी मैंने विस्तारपूर्वक सुना, संसार की असारता को भी… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४८ से १५० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४८ से १५० कन्यादान एवं ब्राह्मणों की परिचर्या का माहात्म्य भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! जो विवाह करने योग्य कन्या को अलंकृतकर ब्राह्मविधि से सुयोग्य वर को प्रदान करता है, यह सात पूर्व… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४७ काञ्चनपुरी व्रत – विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते है – महाराज ! एक बार विश्व के उत्पत्ति, पालन और संहारकारक अक्षर पुरुषोत्तम भगवान विष्णु श्वेतद्वीप में सुखपूर्वक बैठे हुए थे । उसी समय जगन्माता लक्ष्मी ने उनके… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४६ अपराधशतशमन-व्रत महर्षि वसिष्ठजी ने राजा इक्ष्वाकु से कहा — राजन् ! अब आपको एक व्रत बतला रहा हूँ, जिससे महाफल की प्राप्ति होती है और सैकड़ों दोष-पापों का शमन हो जाता है । राजा इक्ष्वाकु ने… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४५ नक्षत्रार्चन-विधि (रोगावलि-चक्र) भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — राजन् ! एक बार कौशिक मुनि अग्निहोत्र करने के बाद सुखपूर्वक बैठे हुए थे । उसी समय महर्षि गर्ग ने उनसे पूछा — ‘ब्रह्मन् ! बंदीगृह में निरुद्ध हो… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १४४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १४४ विनायक-शान्ति महाराज युधिष्ठिर ने कहा — देवेश ! विभो ! अब आप विनायक-शान्ति की विधि मुझे बताये, जिसके करने से सभी मानव समस्त आपत्तियों से मुक्त हो जाते हैं । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — राजेन्द्र !… Read More