भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १३० दीपदान की महिमा-प्रसंग में जातिस्मरा रानी ललिता का आख्यान महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! वह कौन-सा व्रत, तप, नियम अथवा दान है, जिसके करने से इस लोक में अत्यन्त तेजोमय शरीर की प्राप्ति होती… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२७ से १२९ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२७ से १२९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२७ से १२९ इष्टापूर्त की महिमा… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२६ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२६ मरणासन्न (मृत्यु के पूर्व) प्राणी के कर्तव्य तथा ध्यान के चतुर्विध भेद राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! गृहस्थ व्यक्ति को अपने अन्त समय में क्या करना चाहिये । कृपा कर इस विधि को आप… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२५ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२५ ग्रहण-स्नान का माहात्म्य और विधान युधिष्ठिरने कहा — द्रव्य और मन्त्रों की विधियों के ज्ञाता (पूर्णवेदविद्) भगवन् ! सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण के अवसर पर स्नान की जो विधि है, मैं उसे सुनना चाहता हूँ ।… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२४ रुद्र-स्नान की विधि महाराज युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! अब आप सभी दोष को शान्त करनेवाले रुद्र-स्नान के विधान का वर्णन करें । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! इस सम्बन्ध में महर्षि अगस्त्य के… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२३ स्नान और तर्पण-विधि भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — राजन् ! स्नान के बिना न तो शरीर ही निर्मल होता है और न भाव की ही शुद्धि होती है, अतः शरीर की शुद्धि के लिये सबसे पहले… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२२ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२२ माघ-स्नान-विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! कलियुग में मनुष्यों को स्नान-कर्म में शिथिलता रहती है, फिर भी माघ-स्नान का विशेष फल होने से इसकी विधि का वर्णन कर रहा हूँ । जिसके हाथ, पाँव, वाणी,… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२१ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १२१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १२१ प्रकीर्ण व्रत मत्स्यपुराणके १०१ वें अध्याय तथा पद्मपुराणसृष्टिखण्ड, अध्याय २० में भी स्वल्प भेदके साथ इन व्रतोंका वर्णन है। भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं अत्यन्त गुप्त विविध प्रकीर्ण व्रतका वर्णन कर रहा हूँ… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११९ से १२० भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११९ से १२० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११९ से १२० नवोदित चन्द्र, गुरु एवं शुक्र को अर्घ्य देने की विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब मैं नवोदित चन्द्रमा को अर्घ्य देने की विधि बता रहा हूँ । प्रतिमास शुक्ल पक्ष… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११८ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ११८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ११८ महर्षि अगस्त्य की कथा और उनके अर्घ्य-दान की विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! अब आप सभी पापों को दूर करनेवाले अगस्त्य मुनि के चरित्र, अर्घ्यदान की विधि और अगस्त्योदय-काल का वर्णन कीजिये ।… Read More