श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय भगवान् विष्णु का इन्द्र को वृत्रासुर से सन्धि का परामर्श देना, ऋषियों की मध्यस्थता से इन्द्र और वृत्रासुर में सन्धि, इन्द्र द्वारा छलपूर्वक वृत्रासुर का वध छद्मेनेन्द्रेण फेनद्‌वारा पराशक्तिस्मरणमूर्वकं वृत्रहननवर्णनम् व्यासजी बोले — इस प्रकार वरप्राप्त उन… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय भगवान् विष्णु की प्रेरणा से देवताओं का भगवती की स्तुति करना और प्रसन्न होकर भगवती का वरदान देना देवीसमाराधनाय देवकृतस्तुतिवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तब सभी तत्त्वों के ज्ञाता माधव भगवान् विष्णु समस्त देवताओं को… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी का वृत्रासुर को वरदान देना, त्वष्टा की प्रेरणा से वृत्रासुर का स्वर्ग पर आक्रमण करके अपने अधिकार में कर लेना, इन्द्र का पितामह ब्रह्मा और भगवान् शंकर के साथ वैकुण्ठधाम जाना ब्रह्मनेतृत्वे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय वृत्रासुर का देवलोक पर आक्रमण, बृहस्पति द्वारा इन्द्र की भर्त्सना करना और वृत्रासुर को अजेय बतलाना, इन्द्र की पराजय, त्वष्टा के निर्देश से वृत्रासुर का ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिये तपस्यारत होना ब्रह्मणः समाराधनाय त्वष्ट्रा वृत्रोपदेशवर्णनम्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय इन्द्र द्वारा त्रिशिरा का वध, क्रुद्ध त्वष्टा द्वारा अथर्ववेदोक्त मन्त्रों से हवन करके वृत्रासुर को उत्पन्न करना और उसे इन्द्र के वध के लिये प्रेरित करना त्रिशिरवधानन्तरं वृत्रोत्पत्तिवर्णनम् व्यासजी बोले — इस प्रकार लोभ के वशीभूत होकर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-षष्ठ स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-षष्ठ स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय त्रिशिरा की तपस्या से चिन्तित इन्द्र द्वारा तपभंग हेतु अप्सराओं को भेजना त्रिशिरसस्तपोभङ्गाय देवराजेन्द्रद्वारा नानोपायचिन्तनवर्णनम् ऋषिगण बोले — हे महाभाग सूतजी ! आपकी वाणीरूपी अत्यन्त मधुर सुधा का पान करके अभी हम सन्तृप्त नहीं हुए हैं। कृष्णद्वैपायन… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-35 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-पञ्चत्रिंशोऽध्यायः पैंतीसवाँ अध्याय सुरथ और समाधि की तपस्या से प्रसन्न भगवती का प्रकट होना और उन्हें इच्छित वरदान देना सुरथराजसमाधिवैश्ययोर्देवीभक्त्येष्टप्राप्तिवर्णनम् व्यासजी बोले — उनका यह वचन सुनकर दुःखित हृदय वाले वैश्य और राजा ने प्रसन्नतापूर्वक विनम्रभाव से मुनि के चरणों… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-34 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-चतुस्त्रिंशोऽध्यायः चौंतीसवाँ अध्याय मुनि सुमेधा द्वारा देवी की पूजा-विधि का वर्णन भगवत्याः पूजाराधनविधिवर्णनम् राजा बोले — हे भगवन्! अब मुझे उन देवी की आराधना विधि भलीभाँति बताइये; साथ ही पूजा-विधि, हवन की विधि और मन्त्र भी बताइये ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-33 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः तैंतीसवाँ अध्याय मुनि सुमेधा का सुरथ और समाधि को देवी की महिमा बताना सुरथराजसमाधिवैश्ययोर्मुनिसमीपे गमनम् राजा बोले — हे मुने! ये वैश्य हैं, आज ही वन में इनसे मेरी मित्रता हुई है। पत्नी और पुत्रों ने इन्हें निकाल दिया… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-32 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-द्वात्रिंशोऽध्यायः बत्तीसवाँ अध्याय देवीमाहात्म्य के प्रसंग में राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा शुम्भवध जनमेजय बोले — हे मुने! आपने भगवती चण्डिका की महिमा का भलीभाँति वर्णन किया। अब आप यह बताने की कृपा करें कि तीन चरित्रों का… Read More