श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-58 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-58 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय संकष्टचतुर्थीव्रत की महिमा के प्रसंग में भ्रूशुण्डीमुनि के पितरों के उद्धार की कथा अथः अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः सङ्कष्ट चतुर्थी व्रत कथनं ब्रह्माजी बोले — हे व्यासजी ! मरुत्वान् इन्द्र के इस प्रकार के उत्तम वचन सुनकर और उस [भ्रूशुण्डि मुनि की] अमृतोपम कथा का श्रवण कर प्रसन्न हुए राजा शूरसेन… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-57 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-57 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सत्तावनवाँ अध्याय भ्रूशुण्डीमुनि का प्रारम्भिक जीवन, मुद्गलमुनि की उनपर कृपा, उनकी कठोर तपस्या तथा उन्हें गणेश – सारूप्य की प्राप्ति अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः भ्रुशुण्ड्युपाख्यानं शतक्रतु इन्द्र बोले — [हे राजन्!] अब मैं तुमसे इस प्राचीन कथा को कहता हूँ कि जिस प्रकार मुनि भ्रूशुण्डी ने गणाधिपति गणेशजी की भक्ति के प्रभाव… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-56 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-56 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छप्पनवाँ अध्याय गणपत्युपासना की महिमा के सन्दर्भ में भ्रूशुण्डीमुनि का आख्यान अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः इन्द्रविमानपतनं भृगुजी बोले — हे राजन् ! इस प्रकार मैंने [गणेश- चतुर्थी व्रत के] सम्पूर्ण माहात्म्य को कहा। अब जो ब्रह्माजी द्वारा व्यासजी के प्रति कहा गया था, उसे तुम पुनः सुनो ॥ १ ॥ सोमकान्त बोले… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-55 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-55 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचपनवाँ अध्याय गणेशचतुर्थी व्रत के माहात्म्य के सन्दर्भ में राजा चन्द्रांगद और रानी इन्दुमती के पुनर्मिलन की कथा अथः पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः शिवपार्वती संयोग हिमवान् बोले — [हे पार्वती!] इस प्रकार उस रानी इन्दुमती के गणेशचतुर्थीव्रत के पूर्ण होने पर गणेशजी की कृपा से पाताल में नागकन्याओं की मति बदल गयी ॥… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-54 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-54 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौवनवाँ अध्याय प्रजाजनों को आश्वासन देना, रानी इन्दुमती का राजा को मृत समझकर विलाप करना तथा नारदजी के उपदेश से गणेशचतुर्थी का व्रत करना अथः चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः इन्दुमती नारद संवादं पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! उस रानी के मूर्च्छित हो जाने पर प्रजाजनों ने क्या किया ? हृदय को आनन्द… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-53 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-53 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तिरपनवाँ अध्याय हिमवान्-पार्वती-संवाद में राजा चन्द्रांगद का उपाख्यान अथः त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः चन्द्राङ्गदोपाख्यान हिमवान् बोले — हे शुभानने! अब मैं राजा चन्द्रांगद और उनकी पत्नी इन्दुमती द्वारा किये गये इस व्रत को तुमसे कहता हूँ। मालवदेश में कर्ण नाम का एक विख्यात नगर है, वहाँ चन्द्रांगद नाम का अत्यन्त पराक्रमी राजा हुआ… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-52 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-52 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बावनवाँ अध्याय राजा नल के पूर्वजन्म का वृत्तान्त अथः द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः नलव्रत निरुपणं पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! नल कौन थे ? उन नल ने इस [गणेशचतुर्थी] व्रत को किस कारण से किया था ? – यह मुझे बतलाइये । [ गणेशजी के व्रतविषयक] इन आख्यानों को श्रवण करने से… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-51 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-51 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इक्यावनवाँ अध्याय गणेशचतुर्थीव्रतानुष्ठान विधि के वर्णन के प्रसंग में राजा कर्दम के पूर्वजन्म की कथा अथः पञ्चाशत्तमोऽध्यायः हिमवत् पार्वती संवाद पार्वतीजी बोलीं — हे पिताजी ! आपने गणेश- चतुर्थी की महिमा [एवं उसके अनुष्ठानादि का] भली-भाँति वर्णन किया, मैं अब आपके अमृततुल्य वचनों [-के श्रवण]-से प्रसन्न हो गयी हूँ; परंतु… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-50 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-50 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पचासवाँ अध्याय श्रीगणेशजी के मन्त्रों के अनुष्ठान एवं गणेशचतुर्थी व्रत की विधि अथः पञ्चाशत्तमोऽध्यायः हिमवद्गिरिजा संवादे चतुर्थीव्रत कथनं पार्वतीजी बोलीं — हे गिरिराज ! मैं [ गणेशजी का ] मन्त्र नहीं जानती हूँ, अतः आप ही उसे स्वयं बतायें, जिससे मैं गणेशजी का अनुग्रह और कल्याणकारी शिव को प्राप्त कर… Read More
श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-49 श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-49 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय श्रीगणेशजी की पार्थिव पूजा की विधि अथः एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः गणेश पार्थिवपूजा निरूपणं पार्वतीजी बोलीं — हे दयानिधि । हे गिरिराज ! हे पिता! सर्वेश्वर जगद्गुरु गणेशजी की उपासना के विषय में शीघ्र कहिये ॥ १ ॥ जिसके द्वारा मैं सम्यक् रूप से शिव की समीपता प्राप्त करके शाश्वत कल्याण… Read More