श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-48 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय त्रिपुर-विजय के उपलक्ष्य में देवताओं द्वारा त्रिपुरारि-महोत्सव (देव-दीपावली ) – का आयोजन, हिमवान् का पार्वती को गणेशजी की महिमा बताना अथः अष्टचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः पार्वत्यारागमनम्, पार्थिवपूजा (भाद्रपदस्य शुद्धचतुर्थीपर्यन्तम्) महात्म्यम् व्यासजी बोले — हे पितामह! मैंने त्रिपुरासुर के वध से सम्बन्धित महान् आख्यान का श्रवण किया, फिर भी मैं अब यह… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-47 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय त्रिपुरदाह एवं त्रिपुरासुर का वध अथः सप्तचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करत्रिपुरयोर्युद्धम्, त्रिपुरदहनं व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन् ! गजानन गणेशजी के प्रसन्न होने तथा उनसे सहस्र नामों को प्राप्त कर लेने के अनन्तर शिवजी ने क्या किया; यह सब मुझसे कहिये ॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यास!] गणेशजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-46 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय श्रीगणेशसहस्रनाम स्तोत्र अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः शिवस्य वरदानं ॥ व्यास उवाच ॥ कथं नाम्नां सहस्रं स्वं गणेश उपदिष्टवान् । शिवायैतन्ममाचक्ष्व लोकानुग्रहतत्पर ॥ १ ॥ व्यासजी ने पूछा — सम्पूर्ण लोकों के ऊपर अनुग्रह में तत्पर रहनेवाले पितामह! गणेशजी ने भगवान् शिव के प्रति अपने सहस्रनामों का उपदेश किस प्रकार किया,… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-45 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय शिवकृत गणपतिस्तुति अथः पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः शिवस्य वरदानं [ व्यास ] मुनि बोले — [हे ब्रह्मन्!] तब प्रसन्न हुए विघ्नहर्ता देवाधिदेव विघ्नेश्वर के भगवान् शंकर को वर देने के लिये उत्सुक होने पर उन सदाशिव ने क्या-क्या वर माँगे थे?॥ १ ॥ ब्रह्माजी बोले — [हे व्यासजी ! ] गणेशजी… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-44 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय नारदजी के निर्देश से भगवान् शंकर का तप करके गणेशजी को प्रसन्न करना अथः चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः शङ्करेण तपः, गजाननेन दर्शनम्, शङ्करेण वरप्राप्तिः व्यासजी बोले — [हे ब्रह्मन्!] तब त्रिपुरासुर से पराजित शम्भु ने क्या किया ? कैसे उस जयशाली दैत्य त्रिपुरासुर पर उन्होंने विजय प्राप्त की ? ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-43 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय त्रिपुरासुर के साथ युद्ध में भगवान् शंकर की पराजय अथः त्रिचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करस्य पराजय, पार्वत्याश्च हिमालयसमीप गमनं ब्रह्माजी बोले — [ हे व्यासजी ! ] उस द्वन्द्व-युद्ध में गिरिशायी भगवान् शंकर असुर सेनानायक त्रिपुरासुर से, षडानन भगवान् स्कन्द प्रचण्ड से और नन्दी चण्ड से युद्ध करने लगे ॥ १… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-42 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ बयालीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर और त्रिपुरासुर का युद्ध अथः द्विचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः शङ्करत्रिपुरयोर्युद्धम् व्यासजी बोले — [हे ब्रह्मन्!] उन [द्विजश्रेष्ठ] कलाधर के चले जाने के बाद उस दैत्य (त्रिपुरासुर ) – ने क्या किया? उस मंगलमयी चिन्तामणि [गणेशजी की] मूर्ति को उसने कैसे लाकर उन कलाधर को प्रदान किया ? हे चतुरानन… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-41 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ इकतालीसवा अध्याय श्रीगणेशजी का कलाधर विप्र के रूप में त्रिपुरासुर के पास आना और उसे स्वर्ण, रजत एवं लौह से निर्मित तीन पुर प्रदान करना अथः एकचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः गजाननेन ब्राह्मणरूपेण त्रिपुरं पुरतः समर्पणम् व्यासजी बोल — हे चतुर्मुख ब्रह्माजी! [सृजन, पालन और संहार आदि] सम्पूर्ण कार्यों को सम्पन्न करने वाले वरदायक… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-40 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ चालीसवाँ अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और शिव का त्रिपुरासुर के भय से अपने-अपने लोकों से पलायन, देवताओं द्वारा गणेशाराधन, गणेशजी का प्रकट होना, देवताओं द्वारा संकष्टनाशन स्तोत्र से उनका स्तवन अथः चत्वारिंशोऽध्यायः त्रिपुरासुरेण ब्रह्मदेवस्य पराजयः, देवैश्च तपः स्तोत्र निरूपणं ब्रह्माजी बोले — [हे व्यास!] देवलोक पर अधिकार करके वह दैत्य ब्रह्मलोक… Read More


श्रीगणेशपुराण-उपासना-खण्ड-अध्याय-39 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ उनतालीसवाँ अध्याय त्रिपुरासुर का इन्द्र पर आक्रमण कर अमरावतीपुरी पर अधिकार कर लेना अथः एकोनचत्वारिंशोऽध्यायः इन्द्रपराजयः व्यासजी बोले — हे ब्रह्मन्‌! गणेशजी से वरदान प्राप्त करने के बाद वरप्राप्ति के अहंकार से भरे त्रिपुरासुर ने क्या किया? उसे आप बिना कुछ शेष रखे बताइये, उस विषय में मुझे कौतूहल हो… Read More