श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय उद्धवजी द्वारा भगवान् की बाललीलाओं का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — जब विदुरजी ने परम भक्त उद्धव से इस प्रकार उनके प्रियतम श्रीकृष्ण से सम्बन्ध रखनेवाली बातें पूछी, तब उन्हें अपने स्वामी का स्मरण हो आया और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय उद्धव और विदुर की भेंट श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जो बात तुमने पूछी है, वही पूर्वकाल में अपने सुख-समृद्धि से पूर्ण घर को छोड़कर वन में गये हुए विदुरजी ने भगवान् मैत्रेयजी से पूछी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय भागवत के दस लक्षण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस भागवतपुराण में सर्ग, विसर्ग, स्थान, पोषण, ऊति, मन्वन्तर, ईशानुकथा, निरोध, मुक्ति और आश्रय — इन दस विषयों का वर्णन है ॥ १ ॥ इनमें जो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ब्रह्माजी का भगवद्धामदर्शन और भगवान् के द्वारा उन्हें चतुःश्लोकी भागवत का उपदेश श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! जैसे स्वप्न में देखे जानेवाले पदार्थों के साथ उसे देखनेवाले का कोई सम्बन्ध नहीं होता, वैसे ही देहादि… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय राजा परीक्षित् के विविध प्रश्न राजा परीक्षित् ने कहा — भगवन् ! आप वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ । मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि जब ब्रह्माजी ने निर्गुण भगवान् के गुणों का वर्णन करने के लिये… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय भगवान् के लीलावतारों की कथा ब्रह्माजी कहते हैं — अनन्त भगवान् ने प्रलय के जल में डूबी हुई पृथ्वी का उद्धार करने के लिये समस्त यज्ञमय वराह-शरीर ग्रहण किया था । आदिदैत्य हिरण्याक्ष जल के अंदर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय विराट्स्वरूप की विभूतियों का वर्णन ब्रह्माजी कहते हैं — उन्हीं विराट् पुरुष के मुख से वाणी और उसके अधिष्ठातृदेवता अग्नि उत्पन्न हुए हैं । सातों छन्द… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय सृष्टि-वर्णन नारदजी ने पूछा — पिताजी ! आप केवल मेरे ही नहीं, सबके पिता, समस्त देवताओं से श्रेष्ठ एवं सृष्टिकर्ता हैं । आपको मेरा प्रणाम है । आप मुझे यह ज्ञान दीजिये, जिससे आत्मतत्त्व का साक्षात्कार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय राजा का सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजी का कथारम्भ सूतजी कहते हैं — शुकदेवजी के वचन भगवत्तत्त्व का निश्चय करानेवाले थे । उत्तरानन्दन राजा परीक्षित् ने उन्हें सुनकर अपनी शुद्ध बुद्धि भगवान् श्रीकृष्ण के चरणों में अनन्यभाव… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वितीय स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय कामनाओं के अनुसार विभिन्न देवताओं की उपासना तथा भगवद्भक्ति के प्राधान्य का निरूपण श्रीशुकदेवजी ने कहा — परीक्षित् ! तुमने मुझसे जो पूछा था कि मरते समय बुद्धिमान् मनुष्य को क्या करना चाहिये, उसका उत्तर मैंने… Read More