श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय देवहुति के साथ कर्दम प्रजापति का विवाह मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस प्रकार जब कदर्मजी ने मनुजी के सम्पूर्ण गुणों और कर्मों की श्रेष्ठता का वर्णन किया, तो उन्होंने उन निवृत्तिपरायण मुनि से कुछ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २१ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय कर्दमजी की तपस्या और भगवान् का वरदान विदुरजी ने पूछा — भगवन् ! स्वायम्भुव मनु का वंश बड़ा आदरणीय माना गया है । उसमें मैथुनधर्म के द्वारा प्रजा की वृद्धि हुई थी । अब आप मुझे… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २० श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी की रची हुई अनेक प्रकार की सृष्टि का वर्णन शौनकजी कहते हैं — सूतजी ! पृथ्वीरूप आधार पाकर स्वायंभुव मनु ने आगे होनेवाली सन्तति को उत्पन्न करने के लिये किन-किन उपायों का अवलम्बन किया ?… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय हिरण्याक्ष-वध मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! ब्रह्माजी के ये कपटरहित अमृतमय वचन सुनकर भगवान् ने उनके भोलेपन पर मुसकराकर अपने प्रेमपूर्ण कटाक्ष के द्वारा उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली ॥ १ ॥ फिर उन्होंने झपटकर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय हिरण्याक्ष के साथ वराहभगवान् का युद्ध श्रीमैत्रेजी ने कहा — तात ! वरुणजी की यह बात सुनकर वह मदोन्मत्त दैत्य बड़ा प्रसन्न हुआ । उसने उनके इस कथन पर कि ‘तू उनके हाथ से मारा जायगा’… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष का जन्म तथा हिरण्याक्ष की दिग्विजय श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! ब्रह्माजी के कहने से अन्धकार का कारण जानकर देवताओं की शङ्का निवृत्त हो गयी और फिर वे सब स्वर्गलोक को लौट… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय जय-विजय का वैकुण्ठ से पतन श्रीब्रह्माजी ने कहा — देवगण ! जब योगनिष्ठ सनकादि मुनियों ने इस प्रकार स्तुति की, तब वैकुण्ठ-निवास श्रीहरि ने उनकी प्रशंसा करते हुए यह कहा ॥ १ ॥ श्रीभगवान् ने कहा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय जय-विजय को सनकादि का शाप श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! दिति को अपने पुत्रों से देवताओ को कष्ट पहुँचने की आशङ्का थी, इसलिये उसने दूसरों के तेज का नाश करनेवाले इस कश्यपजी के तेज (वीर्य)… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय दिति का गर्भधारण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! प्रयोजनवश सूकर बने श्रीहरि की कथा को मैत्रेयजी के मुख से सुनकर भी भक्तिव्रतधारी विदुजी की पूर्ण तृप्ति न हुई अतः उन्होंने हाथ जोड़कर फिर पूछा ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय वाराह अवतार की कथा श्रीशुकदेवजी ने कहा — राजन् ! मुनिवर मैत्रेयजी के मुख़ से यह परम पुण्यमयी कथा सुनकर श्रीविदुरजी ने फिर पूछा, क्योंकि भगवान् की लीलाकथा में इनका अत्यन्त अनुराग हो गया था ॥… Read More