श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय ध्रुव का वर पाकर घर लौटना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं— विदुरजी ! भगवान् के इस प्रकार आश्वासन देने से देवताओं का भय जाता रहा और वे उन्हें प्रणाम करके स्वर्गलोक को चले गये । तदनन्तर विराट्स्वरूप भगवान्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय ध्रुव का वन-गमन श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — शत्रुसूदन विदुरजी ! सनकादि, नारद, ऋभु, हंस, अरुणि और यति — ब्रह्माजीके इन नैष्टिक ब्रह्मचारी पुत्रों ने गहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं किया (अतः उनके कोई सन्तान नहीं हुई)। अधर्म… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय दक्षयज्ञकी पूर्ति श्रीमैत्रेजी कहते हैं — महाबाहो विदुरजी ! ब्रह्माजी के इस प्रकार प्रार्थना करने पर भगवान् शङ्कर ने प्रसन्नतापूर्वक हँसते हुए कहा — सुनिये ॥ १ ॥ श्रीमहादेवजी ने कहा — ‘प्रजापते ! भगवान् की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय ब्रह्मादि देवताओं का कैलास जाकर श्रीमहादेवजी को मनाना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस प्रकार जब रुद्र के सेवकों ने समस्त देवताओं को हरा दिया और उनके सम्पूर्ण अङ्ग-प्रत्यङ्ग भूत-प्रेतों के त्रिशूल, पट्टिश, खड्ग, गदा,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय वीरभद्रकृत दक्षयज्ञ विध्वंस और दक्षवध श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — महादेवजी ने जब देवर्षि नारद के मुख से सुना कि अपने पिता दक्ष से अपमानित होने के कारण देवी सती ने प्राण त्याग दिये हैं और उसकी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय सती का अग्निप्रवेश श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इतना कहकर भगवान् शङ्कर मौन हो गये । उन्होंने देखा कि दक्ष के यहाँ जाने देने अथवा जाने देने से रोकने दोनों ही अवस्थाओं में सती के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय सती का पिता के यहाँ यज्ञोत्सव में जाने के लिये आग्रह करना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस प्रकार उन ससुर और दामाद को आपस में वैर-विरोध रखते हुए बहुत अधिक समय निकल गया ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवान् शिव और दक्षप्रजापति का मनोमालिन्य विदुरजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! प्रजापति दक्ष तो अपनी लड़कियों से बहुत ही स्नेह रखते थे, फिर उन्होंने अपनी कन्या सती का अनादर करके शीलवानों में सबसे श्रेष्ठ श्रीमहादेवजी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय स्वायम्भुव मनु की कन्याओं के वंश का वर्णन श्रीमैत्रेयज़ी कहते हैं — विदुरजी ! स्वायम्भुव मनु के महारानी शतरूपा से प्रियव्रत और उत्तानपाद— इन दो पुत्रों के सिवा तीन कन्याएँ भी हुई थीं; वे आकूति, देवहूति… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तैंतीसवाँ अध्याय देवहूतिको तत्वज्ञान एवं मोक्षपद की प्राप्ति मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! श्रीकपिल भगवान् के ये वचन सुनकर कर्दमजी की प्रिय पत्नी माता देवहूति के मोह का पर्दा हट गया और वे तत्त्वप्रतिपादक सांख्यशास्त्र के ज्ञान… Read More