श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय महाराज पृथु के सौ अश्वमेध यज्ञ श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! महाराज मनु के ब्रह्मावर्त क्षेत्र में, जहाँ सरस्वती नदी पूर्वमुखी होकर बहती हैं, राजा पृथु ने सौ अश्वमेध-यज्ञों की दीक्षा ली ॥ १ ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय पृथ्वी-दोहन श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस समय महाराज पृथु के होठ क्रोध से काँप रहे थे । उनकी इस प्रकार स्तुति कर पृथ्वी ने अपने हृदय को विचारपूर्वक समाहित किया और डरते-डरते उनसे कहा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय महाराज पृथु का पृथ्वी पर कुपित होना और पृथ्वी के द्वारा उनकी स्तुति करना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — इस प्रकार जब वन्दीजन ने महाराज पृथु के गुण और कर्मों का बखान करके उनकी प्रशंसा की, तब… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय वन्दीजन द्वारा महाराज पृथुकी स्तुति श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — महाराज पृथु ने जब इस प्रकार कहा, तब उनके वचनामृत का आस्वादन करके सूत आदि गायकलोग बड़े प्रसन्न हुए । फिर वे मुनियों की प्ररेणा से उनकी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय महाराज पृथु का आविर्भाव और राज्याभिषेक श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इसके बाद ब्राह्मणों ने पुत्रहीन राजा वेन की भुजाओं का मन्थन किया, तब उनसे एक स्त्री-पुरुष को जोड़ा प्रकट हुआ ॥ १ ॥ ब्रह्मवादी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय राजा वेन की कथा श्रीमैत्रजी कहते हैं — वीरवर विदुरजी ! सभी लोकों की कुशल चाहनेवाले भृगु आदि मुनियों ने देखा कि अङ्ग के चले जाने से अब पृथ्वी की रक्षा करनेवाला कोई नहीं रह गया… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय ध्रुववंश का वर्णन, राजा अङ्ग का चरित्र श्रीसूतजी कहते हैं — शौनकजी ! श्रीमैत्रेय मुनि के मुख से ध्रुवजी के विष्णुपद पर आरूढ़ होने का वृत्तान्त सुनकर विदुरी के हृदय में भगवान् विष्णु की भक्ति का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय ध्रुवजी को कुबेर का वरदान और विष्णुलोक की प्राप्ति श्रीमैत्रेयज़ी कहते हैं — विदुरजी ! ध्रुव का क्रोध शान्त हो गया है और वे यक्षों के वध से निवृत्त हो गये हैं, यह जानकर भगवान् कुबेर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय स्वायम्भुव मनु का ध्रुवजी को युद्ध बंद करने के लिये समझाना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! ऋषियों का ऐसा कथन सुनकर महाराज ध्रुव ने आचमन कर श्रीनारायण के बनाये हुए नारायणास्त्र को अपने धनुष पर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय उत्तम का मारा जाना, ध्रुव का यक्षों के साथ युद्ध श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! ध्रुव ने प्रजापति शिशुमार की पुत्री भ्रमि के साथ विवाह किया, उससे उनके कल्प और वत्सर नाम के दो पुत्र… Read More