श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बत्तीसवाँ अध्याय धूममार्ग और अर्चिरादि मार्ग से जानेवालों की गति का और भक्तियोग की उत्कृष्टता का वर्णन कपिलदेवजी कहते हैं — माताजी ! जो पुरुष घर में रहकर सकामभाव से गृहस्थ के धर्मों का पालन करता है और… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३१ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतीसवाँ अध्याय मनुष्य-योनि को प्राप्त हुए जीव की गति का वर्णन श्रीभगवान् कहते हैं — माताजी ! जब जीव को मनुष्यशरीर में जन्म लेना होता है, तो वह भगवान् की प्रेरणा से अपने पूर्वकर्मानुसार देहप्राप्ति के लिये पुरुष… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३० श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसवाँ अध्याय देह-गेह में आसक्त पुरुषों की अधोगति का वर्णन कपिलदेवजी कहते हैं — माताजी ! जिस प्रकार वायु के द्वारा उड़ाया जानेवाला मेघसमूह उसके बल को नहीं जानता, उसी प्रकार यह जीव भी बलवान् काल की प्रेरणा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतीसवाँ अध्याय भक्ति का मर्म और काल की महिमा देवहूति ने पूछा — प्रभो ! प्रकृति, पुरुष और महत्तत्वादि का जैसा लक्षण सांख्यशास्त्र में कहा गया है तथा जिसके द्वारा उनका वास्तविक स्वरूप अलग-अलग जाना जाता है और… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठाईसवाँ अध्याय अष्टाङ्गयोग की विधि कपिल भगवान् कहते हैं— माताजी ! अब मैं तुम्हें सबीज (ध्येयस्वरूप के आलम्बन से युक्त) योग का लक्षण बताता हूँ, जिसके द्वारा चित्त शुद्ध एवं प्रसन्न होकर परमात्मा के मार्ग में प्रवृत्त हो… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्ताईसवाँ अध्याय प्रकृति-पुरुष के विवेक से मोक्ष-प्राप्ति का वर्णन श्रीभगवान् कहते हैं — माताजी ! जिस तरह जल में प्रतिबिम्बित सूर्य के साथ जल की शीतलता, चञ्चलता आदि गुण का सम्बन्ध नहीं होता, उसी प्रकार प्रकृति के कार्य… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छब्बीसवाँ अध्याय महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वों की उत्पत्ति का वर्णन श्रीभगवान् ने कहा — माताजी ! अब मैं तुम्हें प्रकृति आदि सब तत्त्वों के अलग-अलग लक्षण बतलाता हूँ; इन्हें जानकर मनुष्य प्रकृति के गुणों से मुक्त हो जाता है… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय देवहूति का प्रश्न तथा भगवान् कपिल द्वारा भक्तियोग की महिमा का वर्णन शौनकजी ने पूछा — सूतजी ! तत्त्वों की संख्या करनेवाले भगवान् कपिल साक्षात् अजन्मा नारायण होकर भी लोगों को आत्मज्ञान का उपदेश करने के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय श्रीकपिलदेवजी का जन्म श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — उत्तम गुणों से सुशोभित मनुकुमारी देवहूति ने जब ऐसी वैराग्ययुक्त बातें कहीं, तब कृपालु कर्दम मुनि को भगवान् विष्णु के कथन का स्मरण हो आया और उन्होंने उससे कहा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय कर्दम और देवहूति का विहार श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! माता-पिता के चले जाने पर पति के अभिप्राय को समझ लेने में कुशल साध्वी देवहूति कर्दमजी की प्रतिदिन प्रेमपूर्वक सेवा करने लगी, ठीक उसी तरह,… Read More